शिक्षा व्यवस्था: में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले जाने वाले प्रस्तावित मार्च के दौरान राजधानी दिल्ली में तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। संसद मार्ग की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प हिंसक रूप ले गई, जिसमें 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। घायलों में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों से लेकर कॉन्स्टेबल तक शामिल हैं।
घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। पुलिस ने मामले में कई एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया है।
बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के बाद बढ़ा तनाव
प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च निकालने का प्रयास कर रहे थे। सुरक्षा व्यवस्था के तहत संसद मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात थे तथा कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए गए थे।
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प शुरू हो गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया। इस दौरान लाठीचार्ज और अन्य भीड़ नियंत्रण उपाय अपनाए गए।

118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल, वरिष्ठ अधिकारी भी जख्मी
दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस झड़प में 118 से अधिक पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान घायल हुए हैं। इनमें स्पेशल कमिश्नर, जॉइंट कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर (DCP), कई IPS और DANIPS अधिकारी भी शामिल हैं।
घायल अधिकारियों में डीसीपी (नॉर्थ) राजा बंथिया भी शामिल बताए गए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। इसके अलावा बड़ी संख्या में कॉन्स्टेबल और अन्य पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं।
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने अस्पताल पहुंचकर घायल पुलिसकर्मियों का हालचाल जाना और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
पुलिस का दावा—पत्थरबाजी में कई जवान घायल
घायल पुलिस अधिकारियों में से एक ने बताया कि जनपथ क्षेत्र में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हुए थे। उनके अनुसार, हालात अचानक बिगड़ गए और पत्थरबाजी शुरू हो गई।
अधिकारी ने कहा कि पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर होती चली गई। इसके बाद कई पुलिसकर्मी घायल हुए और वरिष्ठ अधिकारियों को भी चोटें आईं।
हालांकि, प्रदर्शनकारी पक्ष की ओर से भी पुलिस कार्रवाई को लेकर अलग दावे किए गए हैं। इस संबंध में दोनों पक्षों के अलग-अलग बयान सामने आए हैं।
वीडियो फुटेज से होगी पहचान
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन फुटेज और अन्य वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच की जा रही है। जिन लोगों पर हिंसा, पत्थरबाजी या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप साबित होंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कई संदिग्धों की पहचान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आगे भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

सोनम वांगचुक ने जारी रखी भूख हड़ताल
इधर, आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई के बाद उन्होंने अपना आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है।
उन्होंने मांग की कि आंदोलन का प्रतिनिधिमंडल संसद सदस्यों से मुलाकात कर अपनी बात रख सके। उनके अनुसार, जब तक यह संभव नहीं होता, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।
विरोध स्थल से हटाए गए प्रदर्शनकारी
झड़प के बाद पुलिस ने जंतर-मंतर क्षेत्र को खाली कराया। आंदोलन से जुड़े मंच और अस्थायी ढांचों को भी हटाया गया। इसके बावजूद कई प्रदर्शनकारी आसपास के क्षेत्रों में एकत्र होकर विरोध दर्ज कराते रहे।
दिल्ली पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों और अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास न करें तथा केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
ऑनलाइन कक्षाओं का फैसला
राजधानी में प्रदर्शन और यातायात प्रभावित होने के कारण कुछ शैक्षणिक संस्थानों ने भी एहतियाती कदम उठाए। सरदार पटेल विद्यालय ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपनी सभी कक्षाएं ऑनलाइन संचालित करने का निर्णय लिया।
विद्यालय प्रशासन ने अभिभावकों को जारी परामर्श में कहा कि सभी विद्यार्थी निर्धारित समय पर ऑनलाइन कक्षाओं में शामिल हों।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
घटना के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि युवाओं के मुद्दों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
वहीं दिल्ली पुलिस ने दोहराया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है और हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

