कानपुर: उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित और दिल दहला देने वाले मामलों में शामिल ज्योति हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। इसकी वजह सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला है, जिसमें मामले की एक दोषी मनीषा मखीजा को राहत मिली, जबकि अन्य दोषियों की सजा बरकरार रखी गई। इस फैसले के बाद 12 वर्ष पुराना यह मामला फिर चर्चा में आ गया है, जिसने कभी पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था।
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार, ज्योति की हत्या कोई अचानक हुई वारदात नहीं थी, बल्कि महीनों से रची जा रही सुनियोजित साजिश का परिणाम थी। आरोप था कि पति पीयूष श्यामदासानी ने अपनी प्रेमिका और अन्य साथियों के साथ मिलकर पत्नी की हत्या की योजना बनाई थी।
रेस्टोरेंट से शुरू हुई मौत की साजिश
घटना वाले दिन पीयूष अपनी पत्नी ज्योति को शहर के एक रेस्टोरेंट लेकर गया। भोजन के दौरान दोनों के बीच विवाद हुआ। इसके बाद पीयूष कुछ देर के लिए बाहर गया और मोबाइल पर बातचीत की। जांच एजेंसियों के अनुसार, उसी समय हत्या की अंतिम योजना को अंजाम देने की तैयारी की गई।
रेस्टोरेंट से निकलने के बाद कार पहले से मौजूद आरोपियों के कब्जे में चली गई। आरोप है कि पीयूष कार से उतर गया, जबकि बाकी आरोपियों ने ज्योति को कार के अंदर ही चाकुओं से हमला कर मौत के घाट उतार दिया।
चीखती रही ज्योति, फोन पर सुनता रहा पति
जांच में सामने आया कि हमलावरों ने वारदात के दौरान पीयूष से लगातार संपर्क बनाए रखा। आरोप है कि ज्योति की चीखें भी उसे फोन पर सुनाई गईं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतका के शरीर पर कई गंभीर घाव मिले थे। गर्दन, छाती, पीठ और शरीर के अन्य हिस्सों पर धारदार हथियार से वार किए गए थे। चिकित्सकों ने अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर चोटों को मौत का कारण बताया।
अपहरण की कहानी बनाकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश
हत्या के बाद पीयूष सीधे पुलिस थाने पहुंचा और पत्नी के कथित अपहरण की कहानी सुनाई। लेकिन कुछ ही समय बाद उसी की कार से ज्योति का शव बरामद हो गया। शुरुआती जांच में ही पुलिस को उसके बयान पर संदेह हुआ।
इसके बाद मोबाइल कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू हुई। जांच में कथित प्रेमिका मनीषा से लगातार संपर्क, कई संदिग्ध कॉल और फर्जी सिम कार्ड के इस्तेमाल जैसे तथ्य सामने आए।

13 हजार कॉल डिटेल और 22 CCTV फुटेज से खुली साजिश
जांच एजेंसियों ने इस मामले में करीब 13 हजार कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच की। इसके अलावा 22 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। पुलिस ने डिलीट किए गए हजारों मैसेज भी तकनीकी सहायता से रिकवर किए।
चार्जशीट के अनुसार वारदात से पहले और बाद में आरोपियों के बीच लगातार बातचीत हुई थी। मोबाइल लोकेशन, डिजिटल रिकॉर्ड और बरामद सामान को अहम साक्ष्य बनाया गया।
पहले भी की गई थी हत्या की कोशिश
जांच में यह दावा भी सामने आया कि ज्योति की हत्या से पहले उस पर दो बार कथित रूप से हमला करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन वह बच गई थी। पुलिस के अनुसार, यदि 27 जुलाई की वारदात सफल नहीं होती तो आगे भी नई योजना बनाई गई थी।
कोर्ट में क्या हुआ?
मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2022 में पीयूष, उसकी कथित प्रेमिका मनीषा सहित अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था। इसके बाद मामला उच्च न्यायालय और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मनीषा मखीजा को राहत दी, जबकि अन्य दोषियों की सजा को बरकरार रखा। फैसले के बाद मृतका के पिता ने कहा है कि वे मनीषा को मिली राहत के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे।
पिता की न्याय की लड़ाई
ज्योति के पिता ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी। उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘Justice for Jyoti’ अभियान भी चलाया, जिसे हजारों लोगों का समर्थन मिला। उनका कहना है कि वे अंतिम सांस तक न्याय की लड़ाई जारी रखेंगे।
यह मामला आज भी देश के चर्चित आपराधिक मामलों में गिना जाता है, जहां आधुनिक तकनीक, डिजिटल सबूत, कॉल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज ने जांच को निर्णायक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कानपुर का ज्योति हत्याकांड केवल एक हत्या का मामला नहीं, बल्कि सुनियोजित आपराधिक साजिश, डिजिटल फॉरेंसिक जांच और लंबी न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण उदाहरण बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद यह मामला फिर चर्चा में है। अब सभी की नजर संभावित पुनर्विचार याचिका और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर बनी हुई है।

