लखनऊ: अगर आप ब्लड प्रेशर, दर्द, एंटीबायोटिक या एसिडिटी जैसी रोजमर्रा की दवाएं नियमित रूप से लेते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत कई जिलों में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में संदिग्ध दवाएं बरामद की गई हैं। अधिकारियों ने इन दवाओं के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। अंतिम निष्कर्ष लैब रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति नकली या घटिया गुणवत्ता वाली दवाओं का सेवन करता है, तो बीमारी नियंत्रित होने के बजाय गंभीर रूप ले सकती है।
एफएसडीए की टीम ने लखनऊ के अमीनाबाद, बक्शी का तालाब (बीकेटी) और गोंडा जिले में छापेमारी कर करीब 24 लाख रुपये मूल्य की संदिग्ध दवाएं जब्त कीं। जांच के दौरान कई दवाओं के लेबल, बैच नंबर और ब्रांड नामों में अनियमितताएं पाई गईं। अधिकारियों ने कुल 31 नमूने सरकारी प्रयोगशाला भेजे हैं। रिपोर्ट आने के बाद तय होगा कि दवाएं मानक के अनुरूप हैं या नकली।
रोज इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी जांच के घेरे में
कार्रवाई के दौरान जिन दवाओं को जब्त किया गया, उनमें ब्लड प्रेशर, एंटीबायोटिक, दर्द, सूजन, एसिडिटी और एंटी-एंग्जायटी जैसी सामान्य बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। इनमें Telma, Pantop-40, Clavam-625, Zerodol-SP, Alprazolam, Spasmoproxyvon, Chymoral Forte सहित कई चर्चित ब्रांड नाम शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ब्लड प्रेशर की दवा प्रभावी नहीं हुई तो मरीज का रक्तचाप नियंत्रित नहीं होगा, जिससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। इसी तरह, घटिया गुणवत्ता वाली एंटीबायोटिक दवाएं संक्रमण को बढ़ा सकती हैं और बैक्टीरिया में दवा-प्रतिरोध (Antibiotic Resistance) विकसित होने का जोखिम भी पैदा कर सकती हैं।
नकली दवा कैसे बनती है खतरा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि नकली या संदिग्ध दवाओं में या तो आवश्यक सक्रिय तत्व (Active Ingredient) पर्याप्त मात्रा में नहीं होता, या फिर उनकी गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं होती। ऐसी स्थिति में मरीज को अपेक्षित लाभ नहीं मिलता और बीमारी बढ़ सकती है। कुछ मामलों में दवा के दुष्प्रभाव भी गंभीर हो सकते हैं।
इसी वजह से विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दवा हमेशा विश्वसनीय मेडिकल स्टोर से खरीदें, पैकेट पर लिखी जानकारी ध्यान से देखें और किसी भी तरह की शंका होने पर डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लें।
राजस्थान से यूपी तक फैला संदिग्ध नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार प्रारंभिक पड़ताल में यह सामने आया है कि संदिग्ध दवाओं की आपूर्ति राजस्थान से उत्तर प्रदेश के कई जिलों में की जा रही थी। बिना बिल के कम कीमत पर दवाएं खरीदकर उन्हें बाजार में अधिक कीमत पर बेचा जाता था। भुगतान डिजिटल माध्यमों से किया जाता था और निजी बसों सहित अन्य परिवहन साधनों का उपयोग सप्लाई के लिए किया जाता था।
एफएसडीए ने इस मामले में कई लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संस्तुति की है। जांच अभी जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

दवा खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
- हमेशा लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर से ही दवा खरीदें।
- बिल अवश्य लें और उसे सुरक्षित रखें।
- दवा के पैकेट पर ब्रांड नाम, बैच नंबर, निर्माण और समाप्ति तिथि जांचें।
- पैकेजिंग या प्रिंटिंग में गड़बड़ी दिखे तो दवा का उपयोग न करें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बदलने या बंद करने से बचें।
- यदि दवा लेने के बाद असामान्य प्रतिक्रिया हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
लैब रिपोर्ट के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
एफएसडीए अधिकारियों का कहना है कि जब्त दवाओं को फिलहाल संदिग्ध मानते हुए जांच की जा रही है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-सी दवाएं मानक के अनुरूप हैं और कौन-सी नकली या गुणवत्ता में कमी वाली हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
लखनऊ और आसपास के जिलों में हुई कार्रवाई ने एक बार फिर दवा बाजार में गुणवत्ता और निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि जब्त दवाओं के नकली होने की अंतिम पुष्टि अभी लैब रिपोर्ट के बाद ही होगी, लेकिन यह घटना लोगों के लिए सतर्क रहने का संकेत जरूर है। मरीजों को केवल विश्वसनीय स्रोतों से दवाएं खरीदनी चाहिए और किसी भी संदिग्ध दवा की जानकारी तुरंत संबंधित विभाग को देनी चाहिए।

