अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बुधवार को आयोजित महत्वपूर्ण बैठक पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं। यह बैठक कई मायनों में बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें ट्रस्ट के संगठनात्मक ढांचे से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। सबसे अधिक चर्चा पूर्व महासचिव चंपत राय के उत्तराधिकारी, पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति और तीन नए ट्रस्टियों के चयन को लेकर हो रही है।
बैठक मणिरामदास छावनी में ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में शुरू हुई, जिसमें ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। कुछ सदस्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी बैठक से जुड़े।
महासचिव पद को लेकर किसके नाम की चर्चा?
बैठक का सबसे चर्चित एजेंडा नए महासचिव का चयन माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार कार्यवाहक महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन और विश्व हिंदू परिषद के महासचिव बजरंगलाल बांगड़ा स्थायी महासचिव पद की दौड़ में प्रमुख दावेदार बताए जा रहे हैं।
हालांकि ट्रस्ट की ओर से अभी तक किसी भी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अंतिम निर्णय बैठक समाप्त होने के बाद आधिकारिक रूप से घोषित किया जाएगा।
पहली बार CEO की नियुक्ति पर फैसला संभव
सूत्रों के अनुसार बैठक में पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति पर भी विचार किया जा रहा है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक कार्यों को और अधिक व्यवस्थित तथा पेशेवर ढंग से संचालित करने में मदद मिलेगी।
बताया जा रहा है कि CEO की नियुक्ति से निर्माण कार्य, वित्तीय प्रबंधन, प्रशासनिक निर्णय और भविष्य की परियोजनाओं में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा।
तीन नए ट्रस्टियों के चयन पर भी नजर
ट्रस्ट में वर्तमान समय में तीन पद रिक्त हैं। ये पद पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे तथा ट्रस्टी विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद खाली हुए थे।
बैठक में इन रिक्त पदों पर नए ट्रस्टियों के नामों को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। हालांकि संभावित नामों को लेकर ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।

पांच प्रमुख समितियों का हो सकता है पुनर्गठन
बैठक में ट्रस्ट की विभिन्न समितियों के पुनर्गठन पर भी चर्चा जारी है। विशेष रूप से वित्त और ऑडिट समिति को लेकर नए सुझावों पर विचार किया जा रहा है।
हाल के दिनों में सामने आए चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े विवाद के बाद वित्तीय व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है। ट्रस्ट प्रशासन चाहता है कि भविष्य में सभी प्रक्रियाएं अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह हों।
बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद?
बैठक में ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के अलावा कार्यवाहक महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि, ट्रस्ट सदस्य दिनेंद्र दास, स्वामी विश्व प्रसन्न तीर्थ, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, परमानंद जी महाराज और अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी मौजूद रहे।
वहीं पद्मश्री के. परासरन, केंद्रीय सचिव प्रशांत लोखंडे और उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़े।
छावनी परिसर के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम
बैठक को देखते हुए मणिरामदास छावनी और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और परिसर के चारों ओर बैरिकेडिंग की गई है।
आने-जाने वाले लोगों की जांच की जा रही है और प्रशासन पूरे कार्यक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि बैठक शांतिपूर्ण और सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
बैठक के फैसलों पर देशभर की नजर
राम मंदिर ट्रस्ट की यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आगामी वर्षों में मंदिर परिसर के विकास, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, प्रशासनिक व्यवस्था और ट्रस्ट के संगठनात्मक विस्तार से जुड़े कई बड़े निर्णय इसी बैठक में लिए जा सकते हैं।
देशभर के करोड़ों राम भक्तों की नजर अब ट्रस्ट की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई है।

