नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दावा किया है कि उसका आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट बैन कर दिया गया है। संगठन के प्रमुख चेहरों में शामिल अभिजीत दीपके ने इस कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि आंदोलन की आवाज को सोशल मीडिया पर दबाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इस दावे पर संबंधित अधिकारियों या इंस्टाग्राम (मेटा) की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इसी बीच आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और सोशल मीडिया पर वायरल दावों को लेकर कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदर्शन से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है, जबकि पुलिस ने कई वायरल दावों को भ्रामक बताया है।
अभिजीत दीपके ने क्या कहा?
CJP की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि आंदोलन से जुड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि संगठन का इंस्टाग्राम अकाउंट बिना स्पष्ट कारण के बैन कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा और सोशल मीडिया अकाउंट पर कार्रवाई से उनकी आवाज नहीं दबेगी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
हाईकोर्ट ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट में प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने घटना से संबंधित सभी CCTV फुटेज और वीडियो सुरक्षित रखने का आदेश दिया। अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को निर्धारित की गई है।
सोनम वांगचुक की तबीयत स्थिर
मेदांता अस्पताल द्वारा जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर है। उन्हें गुरुग्राम स्थित अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है।
अस्पताल ने बताया कि उनके सभी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतक सामान्य दायरे में हैं और उपचार उनकी सहमति से जारी है।

CJP ने की अनशन समाप्त करने की अपील
संगठन ने सोशल मीडिया पर जारी एक खुले पत्र में सोनम वांगचुक से स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अनशन समाप्त करने की अपील की। पत्र में कहा गया कि उनके त्याग ने हजारों युवाओं को प्रेरित किया है और आंदोलन उनकी अनुपस्थिति में भी जारी रहेगा।
सरकार से बातचीत को लेकर क्या दावा?
CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने दावा किया कि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की ओर से बातचीत का संदेश मिला था। उनके अनुसार, उन्हें किसी सरकारी आवास पर चर्चा के लिए बुलाया गया, लेकिन संगठन ने प्रस्ताव ठुकरा दिया।
सौरभ दास ने कहा कि यदि बातचीत होनी है तो वह जनता के बीच या जंतर-मंतर के पास किसी तटस्थ स्थान पर होनी चाहिए। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दिल्ली पुलिस ने फर्जी खबरों का किया खंडन
दिल्ली पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कम से कम 15 भ्रामक पोस्ट का खंडन किया गया है। पुलिस की फैक्ट-चेक टीम सैकड़ों वीडियो और पोस्ट की जांच कर रही है ताकि गलत सूचना फैलाने वालों की पहचान की जा सके।
इसी क्रम में जंतर-मंतर पर ड्यूटी के दौरान एक पुलिसकर्मी की हार्ट अटैक से मौत होने का वायरल दावा भी जांच में फर्जी पाया गया।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि छात्रों को अपनी बात रखने का अधिकार है और सरकार को जवाब देना चाहिए।
वहीं सपा सांसद जिया-उर-रहमान ने संसद में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पूरे मामले पर चर्चा की मांग दोहराई।
दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी आंदोलन का नेतृत्व नहीं कर रही, बल्कि छात्रों के साथ खड़ी है।
आंदोलन पर बनी हुई है नजर
जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बन चुका है। विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार की ओर से संसद में चर्चा की बात कही जा रही है। इस बीच सोशल मीडिया, अदालत और राजनीतिक बयानबाजी के कारण यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।
CJP द्वारा इंस्टाग्राम अकाउंट बैन किए जाने का दावा, सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति, दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश और सोशल मीडिया पर वायरल दावों की जांच—इन सभी घटनाक्रमों ने छात्र आंदोलन को नई दिशा दे दी है। हालांकि कई दावों पर अभी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई और सरकार-प्रदर्शनकारियों के बीच संभावित बातचीत पर सभी की नजर रहेगी।

