नई दिल्ली। देशभर में कथित पेपर लीक मामलों, परीक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब पूरी तरह राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है। संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे पर तीखी बयानबाजी जारी है। इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में इस मुद्दे पर चर्चा चाहती, तो विपक्ष की पहली मांग पर ही संसद में बहस शुरू कर देती।
खरगे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार ने शुरुआत से ही विपक्ष की मांगों को नजरअंदाज किया। उनका आरोप है कि जब छात्रों के आंदोलन ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया और विपक्ष लगातार चर्चा की मांग करता रहा, तब भी सरकार तैयार नहीं हुई। उनके अनुसार, यदि सरकार की मंशा साफ होती तो संसद के पहले दिन से ही इस विषय पर चर्चा होती।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष
कांग्रेस अध्यक्ष ने दोहराया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लगातार विवादों और पेपर लीक जैसे मामलों के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मंत्री को पद छोड़ देना चाहिए।
खरगे ने कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री अपने पद पर बने रहेंगे, तब तक विपक्ष की नाराजगी खत्म नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेने के बजाय राजनीतिक जवाब देने में व्यस्त है।
प्रधानमंत्री पर भी उठाए सवाल
खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि इस पूरे विवाद पर उनकी चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि यदि लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हो तो सरकार की प्राथमिकता संवाद और समाधान होनी चाहिए।
उनके अनुसार, विपक्ष लगातार छात्रों की आवाज संसद में उठाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सरकार चर्चा से बचती रही। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
संसद में चर्चा को लेकर टकराव
विपक्ष का कहना है कि वह नियम 267 के तहत इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा चाहता था, लेकिन सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया। कांग्रेस का आरोप है कि जब विपक्ष चर्चा की मांग कर रहा था, तब उसे पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
दूसरी ओर सरकार का कहना है कि वह परीक्षा प्रणाली में सुधार और आवश्यक बदलावों को लेकर गंभीर है तथा संसद में चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि विपक्ष इस दावे से सहमत नहीं है और इसे केवल राजनीतिक बयान बता रहा है।

प्रियांक खरगे ने भी साधा निशाना
कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने भी केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए पूछा कि आखिर शिक्षा मंत्री को हटाने में इतनी हिचकिचाहट क्यों है। उन्होंने कहा कि यदि करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है तो सरकार को जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एक मंत्री सरकार के लिए इतने महत्वपूर्ण हैं कि छात्रों की भावनाओं और भविष्य से बड़ा उनका पद हो गया है। उनके अनुसार, सरकार को छात्रों के साथ सीधे संवाद करना चाहिए और उनकी चिंताओं का समाधान निकालना चाहिए।
छात्र आंदोलन बना राष्ट्रीय मुद्दा
पिछले कुछ समय से विभिन्न छात्र संगठन परीक्षा प्रणाली में सुधार, कथित पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई राज्यों में प्रदर्शन हुए हैं और विपक्षी दल भी खुलकर छात्रों के समर्थन में उतर आए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सरकारी जवाबदेही को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है। राजनीतिक दल अपने-अपने तर्क रख रहे हैं, जबकि छात्र संगठनों का कहना है कि उनकी प्राथमिकता केवल निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था और भविष्य की सुरक्षा है।
सरकार का पक्ष
सरकार की ओर से पहले भी कहा गया है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और सुधार की प्रक्रिया जारी है। हालांकि विपक्ष इन दावों को पर्याप्त नहीं मान रहा और जवाबदेही तय करने की मांग पर कायम है।
पेपर लीक विवाद अब केवल शिक्षा का मुद्दा नहीं रह गया है बल्कि यह राजनीतिक और संसदीय बहस का प्रमुख विषय बन चुका है। एक ओर विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं सरकार सुधार और चर्चा की बात कर रही है। आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही और सरकार की आगे की रणनीति पर पूरे देश की नजर रहेगी।

