पांगी/लाहौल-स्पीति: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र लाहौल-स्पीति में शुक्रवार दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। उदयपुर-किलाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कडू नाला के पास अचानक पहाड़ी से भारी चट्टानें और मलबा गिरने से यात्रियों से भरी एक टाटा सूमो टैक्सी उसकी चपेट में आ गई।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वाहन में चालक सहित करीब 14 लोग सवार थे। हादसे में एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि अन्य यात्रियों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन, पुलिस और सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
कैसे हुआ हादसा?
बताया जा रहा है कि उदयपुर-किलाड़ मार्ग एक दिन पहले खराब मौसम के कारण बंद था। रास्ता खुलने के बाद शुक्रवार को कई वाहन अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए।
इसी दौरान कुल्लू से पांगी जा रही टाटा सूमो जब कडू नाला के पास पहुंची, तभी पहाड़ी से अचानक बड़े-बड़े पत्थर और भारी मलबा नीचे आ गिरा। वाहन संभलने का कोई मौका नहीं मिला और पूरी टैक्सी चट्टानों की चपेट में आ गई।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह इलाका पहले भी भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता रहा है, खासकर मानसून के दौरान।
राहत अभियान तुरंत शुरू हुआ
घटना की सूचना मिलते ही सीमा सड़क संगठन (BRO) के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया। शुरुआती प्रयासों में एक घायल व्यक्ति को मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
इसके बाद पुलिस, प्रशासन और अन्य आपदा राहत एजेंसियां भी घटनास्थल पर पहुंच गईं। भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम लगातार जारी है ताकि वाहन तक पहुंचा जा सके।

प्रशासन ने संभाली कमान
हादसे की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। लाहौल पुलिस, तिंदी थाना पुलिस और अन्य विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे।
पांगी के कार्यकारी आवासीय आयुक्त एवं एसडीएम अमनदीप सिंह भी घटनास्थल के लिए रवाना हुए और बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं। जिला प्रशासन लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि सभी यात्रियों के बारे में स्पष्ट जानकारी राहत अभियान पूरा होने के बाद ही सामने आएगी।
मौसम बना सबसे बड़ी चुनौती
राहत कार्य के दौरान सबसे बड़ी समस्या लगातार खराब मौसम और पहाड़ी से गिरते मलबे की है।
बचाव दल को हर कदम बेहद सावधानी से उठाना पड़ रहा है क्योंकि लगातार चट्टानें गिरने का खतरा बना हुआ है। ऐसे हालात में भारी मशीनों और राहतकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि मानसून के दौरान हिमालयी क्षेत्रों में चट्टानों का खिसकना और भूस्खलन की घटनाएं अचानक हो सकती हैं, इसलिए संवेदनशील मार्गों पर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी होती है।
प्रशासन की लोगों से अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट सूचना या सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर भरोसा न करें।
यात्रियों और स्थानीय लोगों से केवल प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक अपडेट पर विश्वास करने को कहा गया है। बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही सभी यात्रियों की स्थिति और अन्य जानकारियां सार्वजनिक की जाएंगी।
मानसून में पहाड़ी मार्गों पर क्यों बढ़ जाता है खतरा?
हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में मानसून के दौरान मिट्टी और चट्टानों की पकड़ कमजोर हो जाती है। लगातार बारिश से पहाड़ों में दरारें विकसित होती हैं, जिससे अचानक भूस्खलन या चट्टान गिरने की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
इसी कारण विशेषज्ञ यात्रियों को सलाह देते हैं कि मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करें तथा संवेदनशील मार्गों पर यात्रा के दौरान विशेष सावधानी बरतें।
लाहौल-स्पीति का यह हादसा एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के दौरान यात्रा के जोखिम को सामने लाता है। फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है तथा प्रशासन का पूरा ध्यान मलबे में फंसे लोगों तक जल्द पहुंचने पर है। जैसे-जैसे अभियान आगे बढ़ेगा, यात्रियों की स्थिति और हादसे से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

