नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में जंतर-मंतर पर चल रहे CJP प्रदर्शन के बीच सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और पोस्ट को लेकर दिल्ली पुलिस ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। शनिवार दोपहर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस अधिकारियों ने दावा किया कि जांच के दौरान कुछ ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट सामने आए हैं, जो भारत के बाहर से संचालित होकर प्रदर्शन से जुड़ी भ्रामक सामग्री प्रसारित कर रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि इन अकाउंट्स के माध्यम से एडिटेड वीडियो, डीपफेक कंटेंट और गलत दावों वाली पोस्ट साझा की जा रही थीं। फिलहाल संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा गया?
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कई पोस्ट और वीडियो की तकनीकी जांच की गई। जांच के दौरान ऐसे अकाउंट्स की पहचान हुई, जिनके बारे में दावा किया गया कि वे पाकिस्तान से संचालित हो रहे हैं और प्रदर्शन से संबंधित भ्रामक सामग्री प्रसारित कर रहे हैं।
पुलिस ने कहा कि इन पोस्टों का उद्देश्य लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करना और गलत जानकारी फैलाना हो सकता है। हालांकि जांच अभी जारी है और संबंधित डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है।
400 से अधिक सोशल मीडिया हैंडल पर कार्रवाई
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अधिकारियों ने जानकारी दी कि अब तक 400 से अधिक सोशल मीडिया हैंडल की पहचान की गई है। पुलिस के अनुसार इन अकाउंट्स पर कथित रूप से AI आधारित कंटेंट, डीपफेक वीडियो, संपादित तस्वीरें और भ्रामक दावे साझा किए जा रहे थे।
अधिकारियों ने बताया कि इन संदिग्ध अकाउंट्स के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की गई है और संबंधित प्लेटफॉर्म के साथ समन्वय भी किया जा रहा है।

डीपफेक और एडिटेड कंटेंट बना चिंता का विषय
डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ डीपफेक वीडियो और एडिटेड विजुअल्स भी बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कंटेंट आम लोगों के लिए वास्तविक और नकली जानकारी के बीच अंतर करना कठिन बना सकते हैं।
इसी वजह से कानून प्रवर्तन एजेंसियां तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल फॉरेंसिक की मदद से ऐसे मामलों की जांच कर रही हैं।
पुलिस ने लोगों से क्या अपील की?
दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की कि किसी भी वीडियो, फोटो या सोशल मीडिया पोस्ट को सत्यापित किए बिना आगे साझा न करें। अधिकारियों ने कहा कि यदि कोई सामग्री संदिग्ध प्रतीत होती है तो उसे आधिकारिक स्रोतों से जांचना चाहिए।
विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि किसी भी वायरल दावे की पुष्टि विश्वसनीय और आधिकारिक जानकारी से करना आवश्यक है, क्योंकि सोशल मीडिया पर प्रसारित हर सामग्री तथ्यात्मक हो, यह जरूरी नहीं होता।
जांच अभी जारी
पुलिस ने स्पष्ट किया कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और सभी डिजिटल साक्ष्यों की समीक्षा की जा रही है। संबंधित जांच एजेंसियां तकनीकी जानकारी के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि संदिग्ध अकाउंट्स का संचालन कहां से हो रहा था और उनका उद्देश्य क्या था।
अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के विस्तृत परीक्षण के बाद ही सामने आएगा।
सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी संवेदनशील घटना के दौरान गलत जानकारी बहुत तेजी से फैल सकती है। ऐसे समय में आधिकारिक बयान, विश्वसनीय समाचार स्रोत और तथ्य आधारित जानकारी पर भरोसा करना बेहद जरूरी होता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म का जिम्मेदारी से उपयोग करने और अपुष्ट दावों को साझा करने से बचने से अफवाहों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है
दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि CJP प्रदर्शन से जुड़ी भ्रामक सामग्री कुछ विदेशी सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए प्रसारित की जा रही थी और 400 से अधिक संदिग्ध हैंडल के खिलाफ कार्रवाई की गई है। हालांकि पूरे मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। ऐसे मामलों में नागरिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे केवल सत्यापित और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।

