नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देशभर में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। विपक्षी दलों के साथ-साथ छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण बताया है। इसी क्रम में लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है।
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए इसे लोकतंत्र, शांति और दृढ़ता की जीत बताया। उन्होंने विशेष रूप से देश के युवाओं, खासकर Gen-Z, को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने डर और भय के माहौल को पीछे छोड़कर अपनी आवाज बुलंद की।
सोशल मीडिया पर क्या बोले सोनम वांगचुक?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोनम वांगचुक ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखा,
“यह लोकतंत्र की जीत है। सीधा लोकतंत्र… जो सड़कों से निकला है। यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। CJP और देश की Gen-Z को बधाई और उन सभी नागरिकों का धन्यवाद, जिन्होंने डर और डर के डर को त्यागकर देश के हर कोने से आवाज उठाई। जवाबदेही से अब सुधार की ओर।”
उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और हजारों लोगों ने इसे साझा करते हुए छात्रों के आंदोलन की सराहना की।
26 दिन तक किया था भूख हड़ताल
NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों के विरोध में सोनम वांगचुक ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी।
उनकी प्रमुख मांग थी कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि शिक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा कमजोर होता है तो इसका सबसे बड़ा नुकसान देश के युवाओं को होगा।
हालांकि बाद में केंद्र सरकार के दो केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई बातचीत के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया था।

36 दिनों तक चला छात्र आंदोलन
NEET-UG परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता गया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्र 36 दिनों तक प्रदर्शन करते रहे। आंदोलन में शामिल छात्रों की प्रमुख मांग थी कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इसी दौरान विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। सोनम वांगचुक का अनशन इस आंदोलन का प्रमुख हिस्सा बन गया था।
इस्तीफे से पहले सरकार ने उठाया बड़ा कदम
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्णय लिया।
इसके साथ ही शिक्षा मंत्रालय के दो वरिष्ठ अधिकारियों का भी तबादला किया गया। सरकार ने इसे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
इसके अगले ही दिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
विपक्ष ने भी बताया छात्रों की जीत
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने इसे छात्रों के संघर्ष की जीत बताया।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि लंबे समय तक चले आंदोलन और जनता के दबाव के बाद सरकार को यह फैसला लेना पड़ा। वहीं सरकार का पक्ष है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लगातार आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
अब सुधारों पर टिकी हैं उम्मीदें
सोनम वांगचुक ने अपनी प्रतिक्रिया में केवल इस्तीफे का स्वागत ही नहीं किया बल्कि यह भी कहा कि अब समय जवाबदेही से आगे बढ़कर शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार करने का है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, छात्रों का भरोसा बहाल करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की होगी।
देशभर के लाखों छात्र अब यह उम्मीद कर रहे हैं कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद शिक्षा व्यवस्था में ठोस और स्थायी बदलाव देखने को मिलेंगे।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोनम वांगचुक की प्रतिक्रिया ने पूरे घटनाक्रम को नया आयाम दिया है। उन्होंने इसे केवल एक राजनीतिक फैसला नहीं बल्कि लोकतंत्र, शांतिपूर्ण आंदोलन और युवाओं की भागीदारी की जीत बताया। हालांकि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की वास्तविक परीक्षा आने वाले समय में होगी, जब सरकार छात्रों की अपेक्षाओं के अनुरूप ठोस कदम उठाएगी। फिलहाल यह घटनाक्रम देश की शिक्षा और राजनीति दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

