पटना: शनिवार को आयोजित बिहार बंद के दौरान राज्य के कई जिलों में प्रदर्शन हिंसक हो गया। राजधानी पटना सहित भागलपुर, पूर्णिया, सारण, औरंगाबाद, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर में प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच टकराव, पथराव, लाठीचार्ज और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। कुछ स्थानों पर पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया, जबकि कई पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के घायल होने की सूचना भी मिली।
इसी बीच दोपहर बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर फैलते ही कई जिलों में प्रदर्शनकारियों ने इसे आंदोलन की सफलता बताते हुए विजय जुलूस निकाले, मिठाइयां बांटीं और नारेबाजी की।
पटना में बमबाजी और पुलिस कार्रवाई
राजधानी पटना में सुबह से ही प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बना रहा। गांधी मैदान से डाक बंगला चौराहे तक कई बार दोनों पक्ष आमने-सामने आए। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग हटाने और आगे बढ़ने की कोशिश की, जबकि पुलिस उन्हें रोकती रही।
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब गांधी मैदान के समीप कुछ उपद्रवियों ने पुलिस की एक गाड़ी पलट दी और यातायात पुलिस पोस्ट पर कथित तौर पर बम फेंका। इसके बाद इलाके में अफरातफरी मच गई और अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया।
पुलिस ने हालात पर नियंत्रण पाने के लिए लाठीचार्ज किया। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया और झड़प में दोनों पक्षों के लोगों के घायल होने की सूचना मिली।
समस्तीपुर में विजय जुलूस और मिठाइयां
समस्तीपुर के ताजपुर में छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर मिलते ही विजय जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारियों ने मिठाइयां बांटी और आंदोलन को छात्रों की जीत बताया।
आंदोलन से जुड़े नेताओं ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ लंबे समय से चल रहा संघर्ष रंग लाया है। साथ ही उन्होंने गिरफ्तार आंदोलनकारियों की रिहाई और दर्ज मुकदमों की वापसी की मांग भी दोहराई।

भागलपुर में पुलिस वाहनों पर पथराव
भागलपुर के तिलकामांझी क्षेत्र में प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों और दंगा नियंत्रण वाहन पर पथराव किया। इससे कई सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार घटना में कुछ लोगों के घायल होने की सूचना है। क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर स्थिति को नियंत्रित किया गया।
पूर्णिया में सड़क पर झड़पें
पूर्णिया में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच लंबे समय तक टकराव जारी रहा। दोनों पक्षों की ओर से पथराव की घटनाएं हुईं, जिससे कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए और यातायात प्रभावित हुआ।
प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की।
औरंगाबाद में आंसू गैस और लाठीचार्ज
औरंगाबाद के रमेश चौक पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच सीधी भिड़ंत हो गई। प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव किए जाने के बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।
इस घटना में कई पुलिसकर्मी और एक पत्रकार घायल हुए, जिनका अस्पताल में इलाज कराया गया। बाद में पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया।
सीतामढ़ी में एसपी घायल
सीतामढ़ी में प्रदर्शन के दौरान जिला पुलिस अधीक्षक अमित रंजन पर हमला हुआ, जिसमें उनके पैर में चोट लगने की जानकारी सामने आई। चोट के बावजूद उन्होंने मौके पर मौजूद रहकर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी जारी रखी।
छपरा में पुलिस वाहन में आग
सारण जिले के छपरा शहर में प्रदर्शन सबसे अधिक उग्र रहा। कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पथराव हुआ। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
इसी दौरान उग्र भीड़ ने पुलिस के एक वाहन में आग लगा दी। आगजनी के बाद शहर में तनाव का माहौल बन गया और कई व्यापारियों ने एहतियातन अपनी दुकानें बंद कर दीं।
मुजफ्फरपुर में धरना प्रदर्शन
मुजफ्फरपुर में बड़ी संख्या में छात्र और कार्यकर्ता समाहरणालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य मार्ग पर बैठकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग दोहराई।
प्रशासन ने पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
इस्तीफे की खबर के बाद बदला माहौल
दोपहर बाद जैसे ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आई, कई स्थानों पर प्रदर्शन की तीव्रता कम हो गई। समस्तीपुर सहित विभिन्न जिलों में प्रदर्शनकारियों ने इसे आंदोलन की सफलता बताते हुए जश्न मनाया।
हालांकि कुछ जिलों में हिंसा और तनाव जारी रहा, जिसके चलते पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहे।
बिहार बंद के दौरान राज्य के कई हिस्सों में प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर ने आंदोलन को नया मोड़ दिया और कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने इसे अपनी जीत बताते हुए जश्न मनाया। दूसरी ओर हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान ने शांतिपूर्ण विरोध और कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। आने वाले दिनों में प्रशासनिक कार्रवाई और आंदोलन की आगे की दिशा पर सभी की नजर रहेगी।

