धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से भी नहीं थमा गतिरोध, अब पीएम मोदी से माफी की मांग पर अड़ा विपक्ष
नई दिल्ली। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी राजनीतिक हलचल थमती नजर नहीं आ रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि केवल मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है। उनका आरोप है कि छात्रों के आंदोलन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष अब संसद के मानसून सत्र में सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) के नेताओं की अहम बैठक होगी। इस बैठक में संसद के भीतर और बाहर अपनाई जाने वाली रणनीति के साथ-साथ ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ पर विपक्ष का रुख भी तय किया जाएगा।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, लेकिन विवाद बरकरार
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं से वह बेहद आहत हैं और इसे व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं बनाना चाहते।
हालांकि विपक्ष का कहना है कि इससे छात्रों के साथ हुए कथित अन्याय की भरपाई नहीं होती। उनका आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया और इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

राहुल गांधी ने अमित शाह को लिखा पत्र
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
पत्र में राहुल गांधी ने पूछा कि क्या प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन और अन्य बल प्रयोग की अनुमति गृह मंत्रालय की ओर से दी गई थी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और सरकार का दायित्व है कि वह संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान निकाले।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यदि छात्रों की आवाज को बलपूर्वक दबाया जाएगा तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा।
कांग्रेस ने पीएम मोदी से मांगी सार्वजनिक माफी
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों के संघर्ष की पहली जीत है, लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आगे आकर छात्रों से माफी मांगनी चाहिए।
खरगे ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि केवल मंत्री बदलने से छात्रों की पीड़ा समाप्त नहीं होगी।
संसद में पेपर लीक कानून पर होगी तीखी बहस
सोमवार को लोकसभा में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ पेश किया जाना प्रस्तावित है।
सरकार का दावा है कि इस कानून का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त रोक लगाना है।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार—
- पेपर लीक या परीक्षा में धांधली करने वालों को 5 से 10 वर्ष तक की जेल हो सकती है।
- दोषियों पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
- यदि अपराध संगठित गिरोह के माध्यम से किया जाता है, तो कम से कम 7 वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
विपक्ष अब इस विधेयक के विभिन्न प्रावधानों का अध्ययन कर यह तय करेगा कि वह इसका समर्थन करेगा या इसमें संशोधन की मांग करेगा।
राजनीतिक टकराव बढ़ने के आसार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में संसद का मानसून सत्र काफी हंगामेदार रह सकता है। एक ओर सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सख्त कानून लाने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष इसे छात्रों के मुद्दों और कथित पुलिस कार्रवाई से जोड़कर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती, तो संसद में NEET पेपर लीक और परीक्षा सुधार का मुद्दा प्रमुख राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बावजूद NEET पेपर लीक विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। विपक्ष अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी, कथित पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग कर रहा है। दूसरी ओर सरकार नए कानून के जरिए परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने का दावा कर रही है। अब संसद में होने वाली बहस इस पूरे विवाद की अगली दिशा तय कर सकती है।

