‘मेरा बेटा चला गया, लेकिन अब कोई और बेटा न जाए’—NEET छात्र के पिता का भावुक संदेश
अहमदाबाद में आत्महत्या करने वाले NEET छात्र कहान पटेल के पिता प्रशांत पटेल ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद गहरी भावनाओं के साथ देश की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ मंत्री बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जहां किसी भी छात्र को निराश होकर आत्महत्या जैसा कदम उठाने की नौबत न आए।
प्रशांत पटेल ने कहा कि उनका बेटा अब कभी वापस नहीं आएगा, लेकिन अगर इस घटना के बाद शिक्षा प्रणाली में बदलाव होता है और किसी दूसरे परिवार को ऐसा दर्द नहीं झेलना पड़ता, तो यही उनके बेटे के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
“बेटा अपने दर्द को छिपाता रहा”
कहान के पिता ने बताया कि उनका बेटा पढ़ाई को लेकर बेहद गंभीर था। उसने कभी परिवार के सामने अपनी मानसिक परेशानियों को जाहिर नहीं किया।
उन्होंने कहा कि कहान अपने छोटे भाई से बेहद प्यार करता था और हमेशा परिवार की उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करता रहा। लेकिन अंदर ही अंदर वह दबाव और तनाव से जूझ रहा था।
प्रशांत पटेल के अनुसार, एक दिन अचानक उनके बेटे ने अहमदाबाद के जगतपुर स्थित इमारत की चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। यह घटना पूरे परिवार के लिए ऐसा सदमा बन गई, जिससे उबर पाना आज भी मुश्किल है।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद भी सुधार की मांग
धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद प्रशांत पटेल ने कहा कि यह केवल शुरुआत है। उनका मानना है कि व्यवस्था में व्यापक सुधार जरूरी है।
उन्होंने कहा,
“ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए कि किसी भी छात्र को आत्महत्या जैसा कदम उठाने की जरूरत ही न पड़े। शिक्षा व्यवस्था ही नहीं, पूरे सिस्टम में सुधार होना चाहिए।”
उनका कहना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और संवेदनशीलता सबसे ज्यादा जरूरी है।

अभिभावकों से की भावुक अपील
प्रशांत पटेल ने देशभर के माता-पिता से भी भावुक अपील की।
उन्होंने कहा कि परीक्षा और करियर की दौड़ में कई बार अभिभावक अपने बच्चों के साथ खुलकर बातचीत नहीं कर पाते। ऐसे में बच्चे मानसिक तनाव से अकेले लड़ते रहते हैं।
उन्होंने कहा,
“अपने बच्चों के लिए समय जरूर निकालिए। सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, उनके मन की बात भी सुनिए। अगर बच्चा तनाव में है तो उसे अकेला मत छोड़िए।”
उनका मानना है कि परिवार का भावनात्मक सहयोग कई बार बड़ी से बड़ी परेशानी को भी कम कर सकता है।
छात्र आंदोलन से जगी उम्मीद
प्रशांत पटेल ने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा था कि NEET पेपर लीक के खिलाफ चल रहा आंदोलन शायद कोई बदलाव नहीं ला पाएगा।
लेकिन जब देशभर के छात्र सड़कों पर उतरे और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बावजूद आंदोलन जारी रखा, तब उन्हें लगा कि इस बार व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद बन सकती है।
उन्होंने कहा कि छात्रों की एकजुटता ने पूरे देश का ध्यान इस मुद्दे की ओर खींचा है और अब सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।
NEET विवाद के बाद बढ़ी सुधार की मांग
NEET परीक्षा को लेकर पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया पर उठे सवालों ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।
इसी विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया। हालांकि कई छात्र संगठन और अभिभावक मानते हैं कि केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं है।
वे चाहते हैं कि—
- परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी बने।
- पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई हो।
- छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेष सहायता व्यवस्था बनाई जाए।
- प्रतियोगी परीक्षाओं का संचालन अधिक सुरक्षित और निष्पक्ष तरीके से किया जाए।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों पर मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
ऐसे में केवल परीक्षा प्रणाली सुधारना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि छात्रों के लिए काउंसलिंग, भावनात्मक सहयोग और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत करना जरूरी है।
अभिभावकों, शिक्षकों और संस्थानों की साझा जिम्मेदारी है कि वे छात्रों पर अत्यधिक दबाव न बनने दें और समय-समय पर उनकी मानसिक स्थिति पर भी ध्यान दें।

