नई दिल्ली। लोकसभा में पेपर लीक रोकने से जुड़े संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्र आंदोलन की सबसे बड़ी जीत बताते हुए कहा कि “सरकार ने एक प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया।”
उन्होंने कहा कि करोड़ों छात्रों और उनके परिवारों के दबाव के कारण सरकार को झुकना पड़ा। साथ ही उन्होंने मांग की कि छात्र आंदोलन के दौरान सरकार द्वारा किए गए सभी आश्वासनों को सार्वजनिक किया जाए।
“युवाओं ने साबित किया कि सरकार भी झुक सकती है”
अपने संबोधन में अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने शुरू से छात्र आंदोलन को करीब से देखा। उनके अनुसार, शुरुआत में सरकार को विश्वास था कि आंदोलन ज्यादा आगे नहीं बढ़ेगा, लेकिन लाखों छात्रों और उनके परिवारों के समर्थन ने हालात बदल दिए।
उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान एक नारा सबसे ज्यादा सुनाई दिया कि “सरकार कभी नहीं झुकेगी, लेकिन झुकाने वाला चाहिए।” अखिलेश ने दावा किया कि यही दबाव था, जिसके चलते सरकार को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना पड़ा।
छात्र आंदोलन को बताया ऐतिहासिक
सपा प्रमुख ने कहा कि यह आंदोलन केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके माता-पिता और परिवार भी खुलकर समर्थन में आए। उन्होंने कहा कि लगभग 20 लाख परीक्षार्थियों और उनके परिवारों को जोड़ दें तो करोड़ों लोग इस मुद्दे से प्रभावित हुए।
उन्होंने किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि जब जनता का दबाव बढ़ता है तो सरकार को फैसले बदलने पड़ते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि छात्रों की बाकी मांगों पर भी सरकार को जल्द निर्णय लेना होगा।
पेपर लीक कानून पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने सरकार से पूछा कि यदि 2024 में बनाया गया पेपर लीक विरोधी कानून प्रभावी था, तो फिर NEET-UG 2026 जैसी परीक्षा में कथित गड़बड़ियां कैसे हुईं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों में अनेक भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं। उन्होंने विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कई मामलों में अदालतों को हस्तक्षेप करना पड़ा और परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं।
उनका कहना था कि केवल नया कानून बना देने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि उसे सख्ती से लागू करना भी जरूरी है।

NTA और आउटसोर्स व्यवस्था पर भी सवाल
संसद में बोलते हुए अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका और जवाबदेही स्पष्ट होनी चाहिए।
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि जिस तरह परीक्षाएं आउटसोर्स हो रही हैं, कहीं ऐसा न हो कि पूरी सरकार ही आउटसोर्स हो जाए।
शिक्षा व्यवस्था और सरकारी स्कूलों का मुद्दा उठाया
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बनने के बाद सरकारी शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हुई है। उन्होंने दावा किया कि देशभर में बड़ी संख्या में सरकारी प्राथमिक विद्यालय बंद किए गए हैं और उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक स्कूल प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि इसका सबसे अधिक असर गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग के बच्चों पर पड़ा है, क्योंकि उनकी प्रारंभिक शिक्षा मुख्य रूप से सरकारी विद्यालयों में होती है।
इसके साथ ही उन्होंने शिक्षक भर्ती, आरक्षण और विभिन्न नियुक्तियों में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए।
भर्ती और रोजगार को लेकर सरकार पर निशाना
सपा प्रमुख ने कहा कि युवाओं को रोजगार देने की बजाय भर्ती प्रक्रियाओं में लगातार देरी और विवाद देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने अग्निवीर भर्ती योजना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य को लेकर सरकार को गंभीरता से सोचने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि यदि भारत अपनी युवा आबादी को जनसांख्यिकीय लाभ के रूप में देखता है, तो शिक्षा और रोजगार को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
किरण रिजिजू से हुई बहस
चर्चा के दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अखिलेश यादव से पूछा कि क्या सरकार का छात्रों की बात सुनकर संसद में विधेयक लाना बेहतर है या फिर आंदोलन को दबाने के लिए आपातकाल लगाना।
इस पर जवाब देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने आपातकाल नहीं देखा, लेकिन दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लगाए गए बैरिकेड, आंसू गैस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई जरूर देखी है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
भाषण का समापन इन शब्दों से किया
अपने संबोधन के अंत में अखिलेश यादव ने कहा कि कानून से अधिक जरूरी सरकार की नीयत होती है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ परीक्षाएं कराएगी तो पेपर लीक जैसी घटनाएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। अपने भाषण का समापन करते हुए उन्होंने कहा,
“अगर शिक्षा अच्छी होगी, परीक्षा सच्ची होगी तो तरक्की भी पक्की होगी। शिक्षा की रक्षा के लिए जो आंदोलन हुआ है, वह आगे भी जीतता रहेगा।”
लोकसभा में पेपर लीक विरोधी संशोधन विधेयक पर हुई बहस केवल कानून तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली, भर्ती प्रक्रिया और छात्र आंदोलन जैसे व्यापक मुद्दों तक पहुंच गई। अखिलेश यादव ने सरकार पर कई राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल उठाए, जबकि सरकार ने विधेयक को परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। आने वाले दिनों में इस विधेयक और इससे जुड़े सुधारों पर राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।

