दुनिया: की सबसे बड़ी हेल्थकेयर और कंज्यूमर प्रोडक्ट कंपनियों में शामिल Johnson & Johnson (J&J) ने अपने टैल्कम पाउडर से जुड़े लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने करीब 5.5 अरब डॉलर के समझौते की घोषणा की है, जिससे लगभग 76 हजार कानूनी दावों का निपटारा होने की उम्मीद है।
यह मामला पिछले एक दशक से वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ था। हजारों महिलाओं ने आरोप लगाया था कि कंपनी के टैल्कम पाउडर के नियमित इस्तेमाल से उन्हें ओवेरियन (डिम्बग्रंथि) कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हुई। हालांकि कंपनी लगातार इन आरोपों को खारिज करती रही और अपने उत्पादों को सुरक्षित बताती रही।
आखिर विवाद शुरू कैसे हुआ?
Johnson & Johnson का बेबी पाउडर वर्षों तक दुनिया के सबसे भरोसेमंद उत्पादों में गिना जाता रहा। लेकिन धीरे-धीरे अमेरिका समेत कई देशों में हजारों महिलाओं ने अदालतों का दरवाजा खटखटाया।
शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि कंपनी के टैल्कम पाउडर में ऐसे तत्व मौजूद थे, जिनसे कैंसर होने का खतरा बढ़ा। कई मामलों में यह भी दावा किया गया कि उत्पाद में एस्बेस्टस जैसे हानिकारक तत्व मौजूद थे।
कंपनी ने हर स्तर पर इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि उसके वैज्ञानिक परीक्षणों में उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित पाया गया है और कैंसर से उसका कोई प्रत्यक्ष संबंध साबित नहीं हुआ है।
76 हजार मामलों का होगा निपटारा
घोषित समझौते के तहत अमेरिका की विभिन्न अदालतों में लंबित लगभग 76 हजार मामलों को समाप्त किया जाएगा। यह समझौता टैल्कम पाउडर से जुड़े अधिकांश मौजूदा दावों को कवर करेगा।
इससे पहले कंपनी एस्बेस्टस और मेसोथेलियोमा से जुड़े कई मामलों का भी अलग से निपटारा कर चुकी है।
कंपनी की लीगल टीम का कहना है कि समझौता दोष स्वीकार करने के लिए नहीं बल्कि वर्षों से चल रही महंगी कानूनी प्रक्रिया को समाप्त करने के उद्देश्य से किया गया है।
क्या बढ़ सकती है समझौते की राशि?
हालांकि अभी समझौते की घोषित राशि 5.5 अरब डॉलर है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह राशि बढ़ सकती है।
समझौते की शर्तों के अनुसार भुगतान कई चरणों में किया जाएगा। कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि कुल भुगतान 7 अरब डॉलर या उससे भी अधिक पहुंच सकता है।
इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए लगभग 95 प्रतिशत दावेदारों की सहमति आवश्यक होगी।

अदालतों में जीत के बावजूद समझौता क्यों?
दिलचस्प बात यह है कि हाल के वर्षों में Johnson & Johnson कई व्यक्तिगत मुकदमों में अदालत से राहत पाने में सफल रही थी। कुछ मामलों में अदालतों ने यह भी कहा कि कैंसर और टैल्कम पाउडर के बीच प्रत्यक्ष संबंध साबित करना आसान नहीं है।
इसके बावजूद कंपनी ने समझौते का रास्ता चुना।
विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं—
- वर्षों से चल रहे मुकदमों को समाप्त कर कंपनी की साख मजबूत करना।
- भविष्य में दवाओं और मेडिकल डिवाइस के अनुसंधान पर अधिक ध्यान केंद्रित करना।
पहले दिवालियापन का रास्ता भी अपनाया
इस विवाद से बचने के लिए कंपनी ने पहले अपनी एक सहायक इकाई बनाकर दिवालियापन कानून का सहारा लेने की कोशिश की थी। इस रणनीति को “Texas Two-Step” कहा गया।
हालांकि अमेरिकी अदालतों ने कंपनी के इन प्रयासों को स्वीकार नहीं किया और दिवालियापन संबंधी याचिकाएं खारिज कर दीं।
अब नया समझौता केवल मौजूदा मामलों पर लागू होगा और भविष्य में आने वाले नए दावों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
क्या टैल्कम पाउडर से वास्तव में कैंसर होता है?
यह सवाल आज भी पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है।
कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में लंबे समय तक टैल्कम पाउडर के इस्तेमाल और ओवेरियन कैंसर के बीच संभावित संबंध की बात कही गई है, जबकि कई अन्य शोधों में स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आया।
इसी वजह से वैज्ञानिक समुदाय और अदालतों में इस विषय पर वर्षों तक बहस चलती रही।
Johnson & Johnson लगातार कहती रही है कि उसके उत्पाद सुरक्षित हैं और विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण कैंसर के आरोपों की पुष्टि नहीं करते।
समझौते का असर
इस समझौते से हजारों दावेदारों को लंबे इंतजार के बाद वित्तीय राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं कंपनी के लिए यह वर्षों से चली आ रही कानूनी अनिश्चितता को समाप्त करने का अवसर माना जा रहा है।
कॉर्पोरेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता उत्पाद दायित्व (Product Liability) से जुड़े इतिहास के सबसे बड़े समझौतों में शामिल हो सकता है।
Johnson & Johnson और टैल्कम पाउडर विवाद केवल एक कंपनी का मामला नहीं बल्कि वैश्विक कॉर्पोरेट जवाबदेही, उपभोक्ता सुरक्षा और उत्पाद गुणवत्ता से जुड़ा बड़ा उदाहरण बन गया है। 10 वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद 5.5 अरब डॉलर के इस समझौते से हजारों मामलों का समाधान होने की उम्मीद है। हालांकि कंपनी अब भी अपने उत्पादों को सुरक्षित बताती है, लेकिन यह समझौता इस बात का संकेत है कि लंबे कानूनी विवादों का आर्थिक और प्रतिष्ठागत प्रभाव कितना बड़ा हो सकता है।

