नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने छात्र आंदोलन, परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
अपने भाषण की शुरुआत करते हुए प्रियंका गांधी ने एक घायल छात्रा से मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छात्रा की मां ने उनसे सवाल किया कि आखिर उनकी बेटी के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया। इसी मुद्दे को आधार बनाते हुए प्रियंका गांधी ने सरकार से पूछा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग क्यों किया गया और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
छात्रों के साथ कैसा व्यवहार हुआ, सरकार जवाब दे
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि छात्र प्रदर्शनकारियों पर आवश्यकता से अधिक पुलिस बल का प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए, लाठीचार्ज किया गया और कथित तौर पर कई छात्र-छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार भी हुआ। उन्होंने कहा कि देश के लाखों छात्र, उनके अभिभावक और शिक्षक इस कार्रवाई का जवाब चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है और छात्रों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे घटनाक्रम की जवाबदेही तय की जाए।
पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक की घटनाओं ने करोड़ों युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है। उनके अनुसार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के कारण छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है।
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार केंद्रीयकरण बढ़ाया गया, जबकि युवाओं की मूल समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि केवल नए कानून बना देने से समस्या समाप्त नहीं होगी, बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करना भी जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिस पर छात्र और अभिभावक दोनों भरोसा कर सकें।
सरकार की प्राथमिकताओं पर भी साधा निशाना
अपने भाषण में प्रियंका गांधी ने शिक्षा बजट, रोजगार और सरकारी नीतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिली।
उन्होंने कहा कि देश के युवाओं का विश्वास दोबारा जीतने के लिए केवल घोषणाएं या नई समितियां पर्याप्त नहीं होंगी। इसके लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे और परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष बनाना होगा।

प्रधानमंत्री पर टिप्पणी, सदन में हंगामा
भाषण के दौरान प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि युवाओं का भरोसा जीतने के लिए केवल कैमरे के सामने संदेश देने से काम नहीं चलेगा।
उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री को कैमरे का नहीं, दिल का एंगल बदलना पड़ेगा।” इस टिप्पणी के बाद सदन में सत्ता पक्ष के सांसदों ने विरोध दर्ज कराया।
नए शिक्षा मंत्री को लेकर टिप्पणी पर विवाद
भाषण के दौरान प्रियंका गांधी ने नए शिक्षा मंत्री को लेकर भी टिप्पणी की, जिस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू सहित भाजपा के कई सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई।
संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि यदि किसी सदस्य द्वारा गंभीर आरोप लगाए जाते हैं तो उन्हें तथ्यों के साथ प्रमाणित किया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग भी की।
इसके बाद कांग्रेस और भाजपा सांसदों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। लोकसभा अध्यक्ष ने हस्तक्षेप करते हुए सभी सदस्यों से केवल विधेयक पर चर्चा करने का आग्रह किया और सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई।
परीक्षा सुधार पर जारी है राजनीतिक बहस
लोकसभा में हुई चर्चा के दौरान विपक्ष ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक रोकने के उपाय, छात्रों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए। वहीं सरकार की ओर से संशोधन विधेयक को परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
आने वाले दिनों में इस विधेयक पर आगे की संसदीय प्रक्रिया और राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।

