नई दिल्ली: लोकसभा में मंगलवार को पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान राजनीतिक माहौल अचानक गर्म हो गया। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान उन पर गोली चलाने का आदेश गृह मंत्री की ओर से दिया गया था। राहुल गांधी के इस बयान के बाद सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया और सदन में भारी हंगामा शुरू हो गया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि इतने गंभीर आरोप बिना किसी प्रमाण के नहीं लगाए जा सकते। उन्होंने राहुल गांधी से सदन में बयान वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
पेपर लीक और छात्र आंदोलन पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रों पर हुई कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ थी। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री अमित शाह ने छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया और अब इस मुद्दे पर जवाब देने से बच रहे हैं।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि देश के युवाओं के साथ अन्याय हुआ है और सरकार उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्रालय स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहा, बल्कि उस पर वैचारिक प्रभाव हावी है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश में शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है और सरकार जितना पैसा पूरे शिक्षा बजट पर खर्च करती है, उससे अधिक खर्च एक परीक्षा की प्रक्रिया पर हो रहा है। उनके अनुसार यह व्यवस्था छात्रों के हितों के अनुरूप नहीं है।
किरेन रिजिजू ने जताई कड़ी आपत्ति
राहुल गांधी के बयान के तुरंत बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू खड़े हुए और उन्होंने इसे बेहद गंभीर आरोप बताया। रिजिजू ने कहा कि गृह मंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति पर बिना किसी साक्ष्य के इस प्रकार का आरोप लगाना उचित नहीं है।
उन्होंने राहुल गांधी से पूछा कि क्या उनके पास इस आरोप का कोई प्रमाण है। यदि नहीं, तो उन्हें सदन से माफी मांगनी चाहिए। रिजिजू ने कहा कि विपक्ष के नेता होने के नाते राहुल गांधी की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है तथा उन्हें तथ्यों के आधार पर ही अपनी बात रखनी चाहिए।

सदन में हुआ जोरदार हंगामा
रिजिजू की आपत्ति के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। दोनों पक्षों के सांसद अपनी-अपनी सीटों से खड़े होकर नारेबाजी करने लगे। माहौल इतना गरमा गया कि लोकसभा अध्यक्ष को कई बार व्यवस्था बनाए रखने की अपील करनी पड़ी।
जब हंगामा शांत नहीं हुआ तो लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2:30 बजे तक स्थगित कर दी गई। कार्यवाही स्थगित होने से पहले भी सदन में लगातार शोर-शराबा जारी रहा।
पेपर लीक कानून पर चल रही थी चर्चा
दरअसल, सदन में उस समय पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा चल रही थी। सरकार का कहना है कि यह संशोधन परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।
वहीं विपक्ष का आरोप है कि पहले से मौजूद कानून प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया, जिसके कारण पेपर लीक जैसी घटनाएं लगातार सामने आती रहीं। इसी मुद्दे पर चर्चा के दौरान छात्र आंदोलनों और पुलिस कार्रवाई का विषय भी बहस का हिस्सा बन गया।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
राहुल गांधी के बयान के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है। भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी के आरोपों को पूरी तरह झूठा और भ्रामक बताया है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि छात्रों के मुद्दों पर सरकार जवाब देने से बच रही है।
अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संसद के अंदर और बाहर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष दोनों इस मुद्दे को लेकर अपनी-अपनी रणनीति के साथ आगे बढ़ सकते हैं।

