लखनऊ। गुरु पूर्णिमा 2026 के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश सहित देशभर में श्रद्धा, भक्ति और गुरु-शिष्य परंपरा का अद्भुत उत्सव देखने को मिला। वृंदावन, अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर लाखों श्रद्धालुओं ने अपने गुरुओं का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस बार गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता और भारतीय परंपराओं का भी अनुपम उदाहरण बनी।
वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़
वृंदावन स्थित केलीकुंज आश्रम में प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आश्रम को भव्य फूलों से सजाया गया था। श्रद्धालुओं ने महाराज के स्वागत में लगभग 50 मीटर तक गुलाब की पंखुड़ियां बिछाईं और दंडवत प्रणाम कर गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
भजन-कीर्तन, गुरु वंदना और पुष्प अर्पण के बीच पूरा आश्रम आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दिया। भक्तों ने प्रेमानंद महाराज के चरण स्पर्श कर जीवन में सुख-शांति और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त किया।
अयोध्या में उमड़ा आस्था का सैलाब
भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में भी गुरु पूर्णिमा का पर्व अत्यंत भव्य रूप में मनाया गया। शहर के करीब 100 मंदिरों को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया, जबकि सुबह से ही सरयू नदी के घाटों पर लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया।
अनुमान है कि दिनभर में दो लाख से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और गुरु पूजन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने अपने गुरुओं के चरणों में पुष्प अर्पित कर धर्म और सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
सीएम योगी ने गुरु परंपरा को किया नमन
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर पहुंचकर महायोगी गुरु गोरखनाथ की पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है और गुरु ही व्यक्ति के जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं।

वाराणसी में मुस्लिम समाज ने उतारी संत की आरती
गुरु पूर्णिमा का सबसे अनूठा और प्रेरणादायक दृश्य वाराणसी के पातालपुरी मठ में देखने को मिला। यहां मुस्लिम समाज के लोगों ने जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज की विधिवत आरती उतारी और उनका आशीर्वाद लिया।
मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने गुरु के चरण स्पर्श कर गुरु-शिष्य परंपरा में अपनी आस्था व्यक्त की। इस अवसर पर जगद्गुरु ने कहा कि भारतीय संस्कृति किसी भी प्रकार के भेदभाव को स्वीकार नहीं करती और गुरु के द्वार सभी के लिए समान रूप से खुले हैं।
धार्मिक और सामाजिक समरसता की इस अनूठी तस्वीर की लोगों ने व्यापक सराहना की। कार्यक्रम में विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लेकर एकता और भाईचारे का संदेश दिया।
प्रयागराज में निकली गुरु वंदना यात्रा
प्रयागराज में सनातनी किन्नर अखाड़े की ओर से भव्य गुरु वंदना यात्रा निकाली गई। आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरि रथ पर सवार रहीं, जबकि किन्नर समुदाय के लोग भजनों पर नृत्य करते हुए यात्रा में शामिल हुए।
इसी दौरान छत्तीसगढ़ से आई एक महिला श्रद्धालु अपने परिवार और लड्डू गोपाल को गोद में लेकर करीब 600 किलोमीटर की यात्रा तय कर संगम पहुंचीं। उन्होंने पवित्र स्नान कर गुरु पूर्णिमा के महत्व को अपने जीवन का सबसे बड़ा आध्यात्मिक अनुभव बताया।
देवकी नंदन महाराज के दर्शन को उमड़े हजारों भक्त
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रसिद्ध कथा वाचक देवकी नंदन ठाकुर महाराज के दर्शन और पूजन के लिए भी लगभग 10 हजार श्रद्धालु पहुंचे। भजन-कीर्तन, गुरु पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भक्तों ने अपने गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया।
वहीं पद्म भूषण साध्वी ऋतंभरा के दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में शिष्य पहुंचे और गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
गुरु पूर्णिमा का आध्यात्मिक संदेश
भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और आत्मजागरण का उत्सव माना जाता है। यह दिन गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का अवसर होता है। इस वर्ष भी देशभर में आयोजित कार्यक्रमों ने गुरु-शिष्य परंपरा की महानता और सामाजिक एकता का संदेश पूरे देश तक पहुंचाया।

