अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद से साइबर अपराध का एक बड़ा मामला सामने आया है। शहर में संचालित एक अवैध कॉल सेंटर का पुलिस ने भंडाफोड़ करते हुए मुख्य आरोपी महेश श्रीचंद श्रॉफ (38) को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह एक रिहायशी फ्लैट से फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर अमेरिकी नागरिकों को आसान लोन दिलाने का झांसा देकर ठगी करता था।
पुलिस की कार्रवाई के दौरान कॉल सेंटर से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, ई-सिम आधारित स्मार्टफोन, लैपटॉप और इंटरनेट रूटिंग डिवाइस बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर धोखाधड़ी के नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
फर्जी फाइनेंस कंपनी बनकर लोगों को बनाते थे शिकार
जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपी खुद को “Cash Advance America” नाम की कथित वित्तीय कंपनी का प्रतिनिधि बताकर अमेरिकी नागरिकों से संपर्क करता था। लोगों को कम ब्याज पर तुरंत लोन दिलाने का भरोसा देकर उनका विश्वास जीतता और फिर उनसे व्यक्तिगत एवं वित्तीय जानकारी हासिल कर लेता था।
पुलिस का कहना है कि इस पूरे ऑपरेशन को बेहद योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया जाता था ताकि पीड़ितों को लंबे समय तक धोखाधड़ी का पता न चल सके।

सोशल सिक्योरिटी नंबर लेकर करते थे ठगी
जांच में सामने आया है कि आरोपी लोन प्रक्रिया पूरी करने के बहाने पीड़ितों से उनका सोशल सिक्योरिटी नंबर (SSN) और अन्य जरूरी जानकारी प्राप्त करता था। इसके बाद उन्हें यह कहकर ऑनलाइन गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए कहा जाता था कि यह लोन इंश्योरेंस या प्रोसेसिंग फीस का हिस्सा है।
जैसे ही पीड़ित गिफ्ट कार्ड खरीदकर उसकी जानकारी साझा करते, गिरोह उससे जुड़ी राशि का दुरुपयोग कर लेता था। पुलिस के अनुसार यह साइबर ठगी का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल होने वाला एक सामान्य तरीका है।
गिफ्ट कार्ड को नकदी में बदलने का आरोप
पुलिस के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में आरोपी का एक सहयोगी मार्टिन भी शामिल बताया जा रहा है, जो गांधीनगर से संपर्क में था। आरोप है कि गिफ्ट कार्ड से प्राप्त रकम को नकदी में बदलने का काम उसी के जरिए किया जाता था।
प्राथमिक जांच के मुताबिक अवैध कमाई का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा महेश अपने पास रखता था, जबकि बाकी राशि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचाई जाती थी।
छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने आरोपी के ठिकाने से कई अहम डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं, जिनमें—
- इंटरनेशनल ई-सिम वाले हाई-एंड स्मार्टफोन
- एक लैपटॉप
- ब्रॉडबैंड रूटिंग उपकरण
- इंटरनेट आधारित कॉलिंग सिस्टम
- अन्य डिजिटल साक्ष्य
बरामद उपकरणों की फोरेंसिक जांच कर यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क के जरिए कितने लोगों को निशाना बनाया गया और कुल कितनी रकम की धोखाधड़ी हुई।
कई धाराओं में दर्ज हुआ मामला
नरोदा पुलिस स्टेशन में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धोखाधड़ी, फर्जी पहचान अपनाने और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस अब इस पूरे गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े संभावित नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।
विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने वाले गिरोहों पर बढ़ी सख्ती
पिछले कुछ वर्षों में भारत के कई शहरों से विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने वाले अवैध कॉल सेंटरों का खुलासा हुआ है। ऐसे मामलों में आरोपी फर्जी बैंक, बीमा कंपनी, तकनीकी सहायता सेवा या लोन कंपनी बनकर लोगों को ठगते हैं।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को किसी भी अनजान कॉल, ईमेल या ऑनलाइन लोन ऑफर पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए और व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से पहले संबंधित संस्था की आधिकारिक पुष्टि अवश्य करनी चाहिए।
पुलिस की अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी संदिग्ध कॉल सेंटर, ऑनलाइन लोन ऑफर या साइबर ठगी की जानकारी मिले तो तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। समय रहते सूचना मिलने से ऐसे संगठित साइबर अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है।

