कानपुर: भारतीय सेना ने देश की सीमाओं पर अत्यधिक ठंडे और चुनौतीपूर्ण इलाकों में तैनात सैनिकों की सुरक्षा और परिचालन क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सेना ने रक्षा मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम ट्रूप कंफर्ट्स लिमिटेड (TCL) को 367 करोड़ रुपये की लागत से 3.50 लाख ‘कोट कांबैट’ तैयार करने का ऑर्डर दिया है।
यह विशेष सैन्य जैकेट सियाचिन ग्लेशियर, लेह-लद्दाख, द्रास और अन्य ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात जवानों के लिए बनाई जा रही है, जहां तापमान अक्सर शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है। आधुनिक तकनीक से तैयार यह कोट सैनिकों को अत्यधिक ठंड से बचाने के साथ-साथ दुश्मनों की नजरों से भी बचाने में मदद करेगा।
डिजिटल कैमोफ्लाज से बढ़ेगी ऑपरेशन क्षमता
‘कोट कांबैट’ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी डिजिटल कैमोफ्लाज प्रिंटिंग है। यह पैटर्न बर्फीले और पहाड़ी क्षेत्रों के वातावरण के अनुरूप तैयार किया गया है, जिससे सैनिक आसपास के प्राकृतिक परिवेश में आसानी से घुल-मिल सकेंगे।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक युद्ध में कैमोफ्लाज तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इससे सैनिकों की पहचान करना दुश्मन के लिए कठिन हो जाता है और ऑपरेशन के दौरान उनकी सुरक्षा भी बढ़ती है।
माइनस 15 डिग्री तक देगा सुरक्षा कवच
टीसीएल द्वारा विकसित इस विशेष जैकेट को 4 डिग्री सेल्सियस से लेकर माइनस 15 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में प्रभावी सुरक्षा देने के लिए तैयार किया गया है।
कोट में ऐसे टेक्निकल टेक्सटाइल्स का उपयोग किया गया है जो गर्माहट बनाए रखने के साथ-साथ हल्के और आरामदायक भी हैं। इसके कारण सैनिकों को कठिन इलाकों में लंबे समय तक गश्त और ऑपरेशन के दौरान अधिक सुविधा मिलेगी।
एनआईएफटी ने तैयार किया डिजाइन
भारतीय सेना की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT), नई दिल्ली ने इस कोट का डिजाइन तैयार किया है।
इसके बाद ट्रूप कंफर्ट्स लिमिटेड ने आधुनिक निर्माण तकनीक और विशेष सैन्य मानकों के अनुरूप इसमें कई तकनीकी सुधार किए, ताकि यह अत्यधिक ठंड, तेज हवाओं और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी प्रभावी साबित हो।

कानपुर और शाहजहांपुर में होगा निर्माण
कोट कांबैट का निर्माण कानपुर और शाहजहांपुर स्थित आयुध निर्माण इकाइयों में किया जाएगा।
ट्रूप कंफर्ट्स लिमिटेड का कहना है कि निगम बनने के बाद कंपनी को मिला यह अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर है। उत्पादन प्रक्रिया शुरू करने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं ताकि निर्धारित समय के भीतर सभी जैकेट भारतीय सेना को उपलब्ध कराई जा सकें।
सैनिकों को मिलेगा बेहतर आराम और सुरक्षा
कोट कांबैट को केवल गर्म रखने के लिए ही नहीं, बल्कि सैनिकों की गतिशीलता (Mobility) को ध्यान में रखकर भी डिजाइन किया गया है।
इसमें ऐसे कपड़े और डिजाइन का इस्तेमाल किया गया है, जिससे जवान कठिन बर्फीले इलाकों में हथियारों और अन्य सैन्य उपकरणों के साथ आसानी से आवाजाही कर सकें।
सैनिकों को ठंड से बचाने के साथ-साथ लंबे समय तक ऑपरेशन के दौरान थकान कम करने और शरीर का तापमान संतुलित रखने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
यह परियोजना भारत के रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी मजबूती देती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश में विकसित और निर्मित आधुनिक सैन्य उपकरणों से न केवल सेना की परिचालन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को भी बल मिलेगा।

