नई दिल्ली: आधुनिक युद्ध की तस्वीर तेजी से बदल रही है। दुनिया की प्रमुख वायु सेनाएं अब केवल तेज गति वाले लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि ऐसे 6वीं पीढ़ी (6th Generation) के फाइटर जेट विकसित कर रही हैं जो स्टील्थ तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन सहयोग, डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स और लंबी दूरी तक बिना रुके मिशन पूरा करने में सक्षम होंगे। इन सभी अत्याधुनिक तकनीकों के केंद्र में एक ऐसी प्रणाली है, जिसे भविष्य का सबसे महत्वपूर्ण इंजन माना जा रहा है—Variable Cycle Engine (VCE)।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यही इंजन दुनिया की सैन्य विमानन तकनीक को नई दिशा देगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जरूरत के अनुसार खुद को बदल सकता है और एक ही इंजन से ईंधन की बचत भी करता है तथा जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त ताकत (थ्रस्ट) भी उपलब्ध कराता है।
क्या है Variable Cycle Engine?
पारंपरिक जेट इंजन या तो अधिक गति और ताकत देने के लिए बनाए जाते हैं या फिर ईंधन बचाने के लिए। लेकिन Variable Cycle Engine इन दोनों क्षमताओं को एक साथ उपलब्ध कराता है।
यह इंजन अपने Bypass Ratio को उड़ान की आवश्यकता के अनुसार बदल सकता है। यदि विमान लंबी दूरी तय कर रहा हो तो इंजन ईंधन बचाने वाले मोड में काम करता है। वहीं युद्ध या तेज रफ्तार की आवश्यकता होने पर यही इंजन अधिक थ्रस्ट उत्पन्न करने वाले मोड में बदल जाता है।
यही वजह है कि इसे भविष्य के लड़ाकू विमानों के लिए सबसे उपयुक्त तकनीक माना जा रहा है।
कैसे करता है काम?
अधिकांश आधुनिक जेट इंजन दो एयरफ्लो स्ट्रीम पर आधारित होते हैं, लेकिन Variable Cycle Engine में तीसरी एयर स्ट्रीम भी होती है।
जब विमान सामान्य उड़ान भर रहा होता है, तब तीसरी स्ट्रीम इंजन को ठंडा रखने और ईंधन की बचत करने में मदद करती है। इससे इंजन की कार्यक्षमता बढ़ती है और विमान अधिक दूरी तक उड़ सकता है।
वहीं युद्ध के समय यही तीसरी स्ट्रीम इंजन के मुख्य हिस्से की ओर मोड़ दी जाती है, जिससे इंजन का पावर आउटपुट और थ्रस्ट काफी बढ़ जाता है। इस तरह एक ही इंजन दो अलग-अलग भूमिकाएं निभाता है।
कम फ्यूल में ज्यादा उड़ान
Variable Cycle Engine का सबसे बड़ा फायदा इसकी शानदार Fuel Efficiency है।
बेहतर ईंधन दक्षता के कारण लड़ाकू विमान हवा में अधिक समय तक रह सकते हैं, लंबी दूरी तक मिशन चला सकते हैं और दुश्मन के क्षेत्र में बिना बार-बार ईंधन भरवाए गहराई तक प्रवेश कर सकते हैं।
सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य के युद्धों में यह क्षमता बेहद अहम होगी क्योंकि हवा में ईंधन भरने वाले बड़े विमान स्टील्थ नहीं होते और वे दुश्मन के रडार पर आसानी से दिखाई दे सकते हैं।
स्टील्थ क्षमता भी होगी मजबूत
Variable Cycle Engine केवल ईंधन बचाने तक सीमित नहीं है।
इसमें आधुनिक थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम और एडवांस्ड कूलिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे इंजन कम गर्मी पैदा करता है।
कम तापीय (Thermal) सिग्नेचर का अर्थ है कि दुश्मन के इंफ्रारेड सेंसर के लिए विमान का पता लगाना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो जाएगा।
यानी यह तकनीक स्टील्थ क्षमता को भी बेहतर बनाएगी।
अमेरिका का XA100 इंजन
दुनिया में सबसे चर्चित Variable Cycle Engine प्रोजेक्ट General Electric का XA100 है।
इसी कंपनी ने भारत के LCA Tejas के लिए F404 और Tejas Mk-2 के लिए F414 इंजन भी विकसित किए हैं।
जमीनी परीक्षणों में XA100 इंजन ने मौजूदा पांचवीं पीढ़ी के इंजनों की तुलना में अधिक थ्रस्ट, बेहतर ईंधन दक्षता और उत्कृष्ट थर्मल मैनेजमेंट का प्रदर्शन किया है।
यूरोप भी पीछे नहीं
केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि यूरोप भी इस तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है।
फ्रांस की कंपनी Safran Future Combat Air System (FCAS) के लिए Adaptive Propulsion System विकसित कर रही है।
वहीं ब्रिटेन, जापान और इटली का संयुक्त Global Combat Air Programme (GCAP) भी Rolls-Royce, Avio Aero और IHI Corporation के सहयोग से अगली पीढ़ी का Variable Cycle Engine तैयार कर रहा है।
इससे स्पष्ट है कि भविष्य की हवाई श्रेष्ठता केवल हथियारों पर नहीं, बल्कि इंजन तकनीक पर भी निर्भर करेगी।
सिविल एविएशन को भी मिल सकता है फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक पूरी तरह सफल होती है तो भविष्य में नागरिक विमानों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।
इससे एयरलाइंस की ईंधन लागत घट सकती है, लंबी दूरी की उड़ानें अधिक किफायती बन सकती हैं और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आ सकती है।

