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    Home»देश»अब हर सड़क पर पैदल चलने वालों का होगा पहला हक? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, केंद्र सरकार को दिए सख्त निर्देश
    देश

    अब हर सड़क पर पैदल चलने वालों का होगा पहला हक? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, केंद्र सरकार को दिए सख्त निर्देश

    Chandra JyotiBy Chandra JyotiAugust 3, 2026No Comments4 Mins Read
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    देशभर: में पैदल चलने वालों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए केंद्र सरकार को बड़ा निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि जहां भी सड़क हो, वहां पैदल यात्रियों के लिए स्पष्ट रूप से चिन्हित, सुरक्षित और अतिक्रमण-मुक्त स्थान उपलब्ध होना चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि बिना बड़े निर्माण या अतिरिक्त खर्च के भी यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि पैदल चलने वालों के लिए निर्धारित स्थान स्पष्ट रूप से अलग हो और उस पर किसी प्रकार का अतिक्रमण न हो। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

    क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

    न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज से कहा कि सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जाएं ताकि पैदल चलने वालों के लिए निर्धारित क्षेत्र सुरक्षित रखा जा सके।

    पीठ ने कहा कि पैदल यात्रियों के लिए बनी जगह का स्पष्ट सीमांकन किया जाए और उसे मोटर वाहनों की लेन से अलग रखा जाए। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि यदि आवश्यक हो तो रस्सी, बैरिकेड या अन्य साधनों से पैदल मार्ग को अलग चिन्हित किया जा सकता है।

    ‘पैदल चलने वालों को होना चाहिए सुरक्षा का भरोसा’

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोगों को यह विश्वास होना चाहिए कि जो स्थान उनके लिए निर्धारित किया गया है, वहां वे बिना किसी वाहन के खतरे के सुरक्षित रूप से चल सकते हैं।

    अदालत ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पैदल यात्रियों की सुरक्षा केवल सड़क निर्माण का विषय नहीं, बल्कि नागरिकों के मूल अधिकारों से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है।

    दो सप्ताह में अधिकारियों को निर्देश देने का आदेश

    सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि वह संबंधित विभागों और अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करे।

    इसके बाद मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की गई है। अदालत यह देखेगी कि उसके निर्देशों के पालन के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

    पहले भी पैदल चलने के अधिकार को बताया था मौलिक अधिकार

    यह पहली बार नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट ने पैदल यात्रियों के अधिकारों पर टिप्पणी की हो।

    इससे पहले 19 जून को दिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि निर्धारित फुटपाथ पर सुरक्षित रूप से चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है।

    अदालत ने स्पष्ट किया था कि जहां पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ निर्धारित हैं, वहां उनके अधिकार को मोटर वाहनों की सुविधा पर प्राथमिकता दी जाएगी।

    संविधान से जुड़ा अधिकार

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व फैसले में कहा था कि सुरक्षित रूप से चलने का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) के तहत दिए गए देश में स्वतंत्र रूप से आने-जाने के अधिकार तथा अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है।

    अदालत का मानना है कि यदि फुटपाथों पर अतिक्रमण हो या पैदल चलने वालों को सड़क पर उतरकर चलना पड़े, तो यह उनके संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित करता है।

    देश के शहरों में बढ़ रही चुनौती

    देश के अधिकांश शहरों में फुटपाथों पर अतिक्रमण, अवैध पार्किंग, रेहड़ी-पटरी और अन्य बाधाओं के कारण पैदल यात्रियों को सड़क पर चलना पड़ता है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा काफी बढ़ जाता है।

    सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से यह मांग करते रहे हैं कि शहरों की योजना बनाते समय पैदल यात्रियों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।

    सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    सरकार और स्थानीय निकायों की होगी जिम्मेदारी

    यदि अदालत के निर्देशों का प्रभावी तरीके से पालन होता है, तो नगर निगमों, विकास प्राधिकरणों, लोक निर्माण विभाग और यातायात पुलिस को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि फुटपाथ अतिक्रमण-मुक्त रहें और पैदल यात्रियों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध हो।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आने के साथ-साथ शहरों की यातायात व्यवस्था भी अधिक व्यवस्थित हो सकती है।

    सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश देशभर में पैदल चलने वालों के अधिकारों और सड़क सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि हर सड़क पर पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित, स्पष्ट रूप से चिन्हित और अतिक्रमण-मुक्त स्थान होना चाहिए। अब सभी की नजर केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों द्वारा इन निर्देशों के पालन पर रहेगी।

    Constitution Encroachment Footpath India News Legal News Pedestrian Rights Public Safety Road safety Supreme Court Traffic Rules
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