दिल्ली के होटल में मौत की आग! 6 मंजिला इमारत बनी मौत का जाल, 21 की दर्दनाक मौत; जान बचाने को चौथी मंजिल से कूदे लोग

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लरिश स्टे होटल में बुधवार सुबह लगी भीषण आग ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। देखते ही देखते छह मंजिला इमारत आग के गोले में तब्दील हो गई और होटल में ठहरे लोग जान बचाने के लिए खिड़कियों और बालकनियों से कूदने को मजबूर हो गए। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। मृतकों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की बताई जा रही है।

घटना सुबह करीब 8:30 बजे शुरू हुई, जबकि फायर ब्रिगेड को इसकी सूचना लगभग 8:50 बजे मिली। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आग सबसे पहले इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित रेस्टोरेंट में लगी और कुछ ही मिनटों में पूरे होटल में फैल गई। धुएं और आग की लपटों ने ऊपरी मंजिलों पर मौजूद लोगों को चारों तरफ से घेर लिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार होटल से लगातार धमाकों जैसी आवाजें सुनाई दे रही थीं। जैसे ही लोगों को आग लगने की जानकारी मिली, आसपास के निवासी मौके पर पहुंच गए और राहत कार्य शुरू कर दिया। कई लोगों ने होटल के नीचे गद्दे और रजाइयां बिछाईं ताकि ऊपर से कूदने वालों की जान बचाई जा सके।

हादसे का सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया जब एक मां अपने छोटे बच्चे को सीने से चिपकाकर तीसरी मंजिल से कूद गई। सौभाग्य से नीचे बिछाए गए गद्दों की वजह से दोनों की जान बच गई। हालांकि महिला को गंभीर चोटें आई हैं और दोनों का अस्पताल में इलाज जारी है।

दिल्ली फायर सर्विस के अधिकारियों के मुताबिक कुल 37 से 40 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बेसमेंट में फंसे छह लोगों को विशेष अभियान चलाकर बचाया गया। वहीं कई लोगों को धुएं के कारण सांस लेने में परेशानी हुई और उन्हें तत्काल अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

मैक्स अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि उनके यहां 39 लोगों को लाया गया था, जिनमें से 18 की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो चुकी थी। कई मरीज आईसीयू में भर्ती हैं और कुछ वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। एम्स में भी 13 लोगों का इलाज जारी है।

जांच में सामने आया है कि फ्लरिश स्टे होटल को केवल छह कमरों के संचालन की अनुमति मिली थी, लेकिन यहां लगभग 25 कमरे संचालित किए जा रहे थे। सबसे गंभीर बात यह है कि होटल के पास वैध फायर एनओसी भी नहीं थी। इमारत में प्रवेश और निकास का केवल एक संकरा रास्ता था, जिससे आपात स्थिति में लोगों को बाहर निकलने में भारी दिक्कत हुई।

चश्मदीदों ने बताया कि होटल का मुख्य गेट इलेक्ट्रॉनिक था और बिजली आपूर्ति बंद होने के बाद वह लॉक हो गया। इससे कई लोग अंदर फंस गए। स्थानीय लोगों ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की।

दिल्ली पुलिस के अनुसार बचाव अभियान के दौरान 10 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। इनमें पांच हेड कांस्टेबल और पांच कांस्टेबल शामिल हैं। सभी का इलाज चल रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

फिलहाल फोरेंसिक टीम मौके पर जांच कर रही है। आग लगने के वास्तविक कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन शुरुआती संकेत सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा कर रहे हैं। यह हादसा एक बार फिर राजधानी में होटल और व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते राहत कार्य शुरू नहीं किया जाता तो मृतकों की संख्या कहीं अधिक हो सकती थी। अब पूरे देश की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है कि आखिर इस भयावह त्रासदी का जिम्मेदार कौन है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *