गुजरात: पुलिस ने एक बड़े एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग ऑपरेशन में ऐसी सफलता हासिल की है जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बिहार से मजदूरी के लिए गुजरात लाए जा रहे 90 से अधिक मासूम बच्चों को पुलिस ने सुरक्षित रेस्क्यू किया है। यह कार्रवाई “ऑपरेशन मिलाप” के तहत की गई, जिसमें Gujarat Police की CID क्राइम एंड रेलवे यूनिट और राजकीय रेलवे पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाया।
पुलिस के अनुसार बच्चों को ट्रेनों के जरिए गुजरात लाया जा रहा था, जहां उनसे मजदूरी कराए जाने की आशंका थी। गुप्त सूचना मिलने के बाद पुलिस ने ट्रेनों को ट्रैक किया और अहमदाबाद रेलवे स्टेशन से 70 तथा वडोदरा रेलवे स्टेशन से 20 बच्चों को सुरक्षित मुक्त कराया।
‘सीक्रेट इनपुट’ से शुरू हुआ ऑपरेशन
गुजरात पुलिस के एडीजीपी Ajay Chaudhary ने इस पूरे अभियान की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि बिहार से बड़ी संख्या में बच्चों को मजदूरी के लिए गुजरात लाया जा रहा है।
इसके बाद CID क्राइम एंड रेलवे के प्रमुख K. L. N. Rao के निर्देशन में विशेष टीम बनाई गई। पश्चिम रेलवे के एसपी और आईपीएस अधिकारी Abhay Soni की अगुवाई में ट्रेनों की निगरानी शुरू की गई।
जैसे ही संदिग्ध ट्रेनों की पहचान हुई, पुलिस टीमों ने रेलवे स्टेशनों पर कार्रवाई कर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला।
मासूमों को सुरक्षित रखा गया
पुलिस अधिकारियों के अनुसार सभी बच्चों को रेस्क्यू करने के बाद सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है। उन्हें भोजन, पानी और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही बच्चों की काउंसलिंग और मेडिकल जांच भी कराई जा रही है।
एडीजीपी अजय चौधरी ने कहा कि इस मामले में शामिल मानव तस्करी और मजदूरी माफियाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बच्चों को कहां और किस काम के लिए ले जाया जा रहा था।

मजदूरी के लिए हो रही थी तस्करी की आशंका
जांच एजेंसियों को शक है कि बच्चों को फैक्ट्रियों, छोटे उद्योगों या अन्य मजदूरी वाले कामों में लगाने के लिए गुजरात लाया जा रहा था। कई बार गरीब परिवारों को झूठे वादे कर बच्चों को दूसरे राज्यों में भेज दिया जाता है, जहां उनसे कम मजदूरी पर लंबे समय तक काम कराया जाता है।
पुलिस अब बच्चों के परिवारों की पहचान करने और उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाने की प्रक्रिया भी शुरू कर रही है।
‘ऑपरेशन मिलाप’ की दूसरी बड़ी सफलता
यह पहली बार नहीं है जब “ऑपरेशन मिलाप” चर्चा में आया हो। कुछ दिन पहले ही गुजरात पुलिस ने इसी अभियान के तहत 701 लापता लोगों को उनके परिवारों से मिलाने में सफलता हासिल की थी।
Harsh Sanghavi ने भी इस अभियान की सराहना की थी। पुलिस के अनुसार 2007 से लेकर अब तक राज्य में 24 हजार से अधिक गुमशुदगी के मामले दर्ज किए गए हैं।
अब इसी अभियान के तहत बच्चों की तस्करी और बाल मजदूरी के खिलाफ भी कार्रवाई तेज कर दी गई है।
बाल तस्करी पर बड़ा सवाल
यह मामला देश में बाल तस्करी और बाल मजदूरी की गंभीर समस्या को फिर सामने लाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक तंगी और शिक्षा की कमी के कारण गरीब परिवारों के बच्चे अक्सर ऐसे गिरोहों का शिकार बन जाते हैं।
रेलवे स्टेशन और लंबी दूरी की ट्रेनों का इस्तेमाल अक्सर बच्चों को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाने के लिए किया जाता है। ऐसे में पुलिस और रेलवे सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बेहद जरूरी मानी जाती है।
पुलिस की अपील
गुजरात पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर कहीं भी बच्चों को संदिग्ध परिस्थितियों में ले जाते हुए देखा जाए तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। साथ ही रेलवे स्टेशनों पर अकेले या डरे हुए बच्चों पर नजर रखने की सलाह भी दी गई है।