रोम/नई दिल्ली: “मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?” — 90 के दशक का यह मशहूर विज्ञापन एक बार फिर चर्चा में है। वजह हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्होंने अपने इटली दौरे के दौरान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को भारत की मशहूर Melody टॉफी गिफ्ट की। इस छोटे से ‘मीठे’ तोहफे ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया और देखते ही देखते Melody फिर से ट्रेंड करने लगी।
जॉर्जिया मेलोनी ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो शेयर करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री मोदी मेरे लिए बहुत अच्छी टॉफी लेकर आए—Melody। Thank You!” इसके बाद इंटरनेट पर #Melody और #ModiMeloni ट्रेंड करने लगे।
लेकिन सवाल सिर्फ इतना नहीं कि मोदी ने मेलोनी को टॉफी क्यों दी। असली दिलचस्प कहानी उस Melody की है, जिसने करीब 40 सालों से भारतीयों के बचपन में मिठास घोली है।
कब लॉन्च हुई थी Melody टॉफी?
Melody टॉफी को भारत की मशहूर FMCG कंपनी Parle Products ने 1980 के दशक के आखिर में लॉन्च किया था। उस दौर में भारत में चॉकलेट और कैरेमल फ्लेवर वाली टॉफियां तेजी से लोकप्रिय हो रही थीं।
Melody की खासियत थी इसका अनोखा स्वाद — बाहर से कैरेमल और अंदर से चॉकलेट फिलिंग। यही वजह थी कि यह बच्चों के साथ-साथ बड़ों की भी पसंद बन गई।
कम कीमत और अलग स्वाद के कारण Melody जल्दी ही देशभर की किराना दुकानों और स्कूल कैंटीनों में छा गई।
“मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?” बना आइकॉनिक डायलॉग
1990 के दशक में टीवी पर आने वाला Melody का विज्ञापन भारतीय पॉप कल्चर का हिस्सा बन गया। विज्ञापन की लाइन — “Melody इतनी चॉकलेटी क्यों है?” — आज भी लोगों की जुबान पर है।
इस टैगलाइन ने Melody को सिर्फ एक टॉफी नहीं, बल्कि एक इमोशनल ब्रांड बना दिया। सोशल मीडिया पर आज भी लोग इस डायलॉग का इस्तेमाल मजाकिया और नॉस्टैल्जिक अंदाज में करते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में किसी कैंडी ब्रांड को इतनी लंबी लोकप्रियता बहुत कम मिली है।

मोदी का ‘सॉफ्ट डिप्लोमेसी’ वाला अंदाज
प्रधानमंत्री मोदी अक्सर विदेशी नेताओं को भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़े खास तोहफे देते रहे हैं। लेकिन इस बार उन्होंने किसी महंगी कलाकृति या शॉल की जगह एक आम भारतीय टॉफी चुनकर लोगों को चौंका दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह “सॉफ्ट डिप्लोमेसी” का शानदार उदाहरण है, जहां एक साधारण भारतीय ब्रांड को वैश्विक मंच पर पहचान मिली।
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने लिखा कि “Melody अब लोकल से ग्लोबल हो गई।”
रोम तक पहुंची भारतीय बचपन की मिठास
जैसे ही मेलोनी ने वीडियो शेयर किया, भारत में लोगों ने अपने बचपन की यादें साझा करनी शुरू कर दीं। किसी ने स्कूल की कैंटीन याद की तो किसी ने 50 पैसे में मिलने वाली टॉफी का जिक्र किया।
कई यूजर्स ने मजाक में लिखा, “अब दुनिया भी जान जाएगी कि Melody इतनी चॉकलेटी क्यों है।”
कुछ लोगों ने इसे भारत की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए कहा कि जिस तरह जापान अपने एनीमे और कोरिया अपने K-Pop के जरिए दुनिया में पहचान बना रहे हैं, उसी तरह भारत के छोटे-छोटे ब्रांड भी ग्लोबल चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।
क्या Melody की बिक्री पर पड़ेगा असर?
मार्केटिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी और मेलोनी की इस वायरल मुलाकात का सीधा फायदा Melody ब्रांड को मिल सकता है।
किसी बड़े वैश्विक नेता के हाथ में किसी उत्पाद का दिखना ब्रांड वैल्यू को बढ़ाता है। सोशल मीडिया पर Melody को लेकर बढ़ती चर्चा इसका संकेत भी दे रही है।
हालांकि Parle Products की तरफ से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन इंटरनेट पर लोग इसे “फ्री इंटरनेशनल प्रमोशन” बता रहे हैं।
भारत-इटली रिश्तों में भी दिखी मिठास
Melody टॉफी का यह छोटा-सा गिफ्ट ऐसे समय आया है जब भारत और इटली के बीच रणनीतिक और आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं।
दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, हरित ऊर्जा और IMEC कॉरिडोर जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर बातचीत जारी है। ऐसे में यह मीठा तोहफा दोनों नेताओं की दोस्ती और व्यक्तिगत केमिस्ट्री का प्रतीक भी माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जॉर्जिया मेलोनी को दी गई Melody टॉफी सिर्फ एक गिफ्ट नहीं, बल्कि भारतीय पॉप कल्चर, बचपन की यादों और सॉफ्ट डिप्लोमेसी का अनोखा मेल बन गई। करीब 40 साल पुरानी इस टॉफी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि छोटी चीजें भी बड़े स्तर पर पहचान बना सकती हैं। अब शायद दुनिया भी पूछ रही है — “Melody इतनी चॉकलेटी क्यों है?”