गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में बिजली विभाग का एक आंतरिक विवाद अब सोशल मीडिया पर वायरल होकर बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बन गया है। आर्यनगर विद्युत उपकेंद्र पर आयोजित बिजली कैंप में टेंट न लगाए जाने को लेकर अधिशासी अभियंता (XEN) रणवीर सिंह और कार्यकारी सहायक दिग्विजय सिंह के बीच हुई तीखी फोन वार्ता का ऑडियो सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।
वायरल ऑडियो में अधिशासी अभियंता कथित तौर पर अमर्यादित भाषा और धमकी भरे लहजे में बात करते सुनाई दे रहे हैं। मामला तूल पकड़ने के बाद बिजली विभाग के मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ ने तत्काल जांच के आदेश देते हुए दो सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है।
टेंट विवाद से शुरू हुआ पूरा मामला
जानकारी के अनुसार आर्यनगर विद्युत उपकेंद्र पर विभागीय कैंप आयोजित किया गया था। कैंप में उपभोक्ताओं की समस्याएं सुनने और बिजली बिल से जुड़े मामलों का समाधान किया जाना था। लेकिन कैंप स्थल पर टेंट की व्यवस्था नहीं की गई, जिससे अधिशासी अभियंता रणवीर सिंह नाराज हो गए।
उन्होंने आर्यनगर उपकेंद्र में तैनात कार्यकारी सहायक दिग्विजय Singh को फोन कर व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। इसी दौरान दोनों के बीच तीखी बहस हो गई।
वायरल ऑडियो में क्या बोले XEN?
सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो में रणवीर सिंह काफी नाराज दिखाई दे रहे हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “कोई काम कायदे से करना आता है कि नहीं? तुम्हारा ही कैंप एमडी को दिखाऊंगा। सारी बाबूगिरी दो मिनट में निकल जाएगी।”
ऑडियो में वे यह भी कहते सुनाई देते हैं कि “यहां बड़े-बड़े बाबू बने बैठे हो। टेंट लगवाकर दिखाओ मुझे। नहीं लगा है तो उसे यहां बुलाओ।”
वहीं दिग्विजय सिंह अपनी सफाई में बार-बार कहते सुनाई देते हैं कि टेंट लगवाने की जिम्मेदारी आमतौर पर JE और SDO संभालते हैं और इस बार JE छुट्टी पर थे।
सोशल मीडिया पर मचा बवाल
ऑडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई लोगों ने सरकारी विभागों में अधिकारियों के व्यवहार पर सवाल उठाए, जबकि कुछ यूजर्स ने इसे प्रशासनिक दबाव और कार्य संस्कृति से जोड़कर देखा।
विभागीय कर्मचारियों के बीच भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सार्वजनिक रूप से या फोन पर इस तरह की भाषा का प्रयोग कार्यस्थल का माहौल खराब करता है।

मुख्य अभियंता ने गठित की जांच समिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए गोंडा बिजली विभाग के मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की है।
इस कमेटी में अधीक्षण अभियंता सुशील कुमार यादव को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि उपमुख्य लेखाधिकारी बासु ब्रह्म महेंद्र को सदस्य नियुक्त किया गया है।
कमेटी को निर्देश दिए गए हैं कि वह एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपे और यह बताए कि बातचीत के दौरान अमर्यादित भाषा का प्रयोग हुआ या नहीं तथा इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
मुख्य अभियंता का बड़ा बयान
मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ ने कहा कि शिकायतकर्ता इस व्यवहार से आहत हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी अधिकारी को अमर्यादित भाषा या असंसदीय शब्दों के प्रयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती।
उन्होंने बताया कि करनैलगंज विद्युत वितरण खंड के अधिशासी अभियंता रणवीर सिंह द्वारा कार्यकारी सहायक दिग्विजय सिंह से कथित रूप से अनुचित भाषा में बातचीत की गई थी, जिसकी जांच कराई जा रही है।
विभागीय कार्यशैली पर उठे सवाल
यह मामला सामने आने के बाद बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी विभागों में संवाद का तरीका मर्यादित और पेशेवर होना चाहिए।
वहीं कुछ कर्मचारियों का मानना है कि फील्ड में संसाधनों की कमी और जिम्मेदारियों की अस्पष्टता के कारण अक्सर ऐसे विवाद सामने आते हैं।
इस घटना ने यह भी उजागर किया है कि विभागीय स्तर पर कार्यों के स्पष्ट बंटवारे और बेहतर समन्वय की जरूरत है, ताकि इस तरह की परिस्थितियां उत्पन्न न हों।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
अब सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो सकती है।
वहीं दूसरी ओर, यह मामला उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों में कर्मचारियों के साथ व्यवहार और प्रशासनिक अनुशासन को लेकर भी नई बहस छेड़ चुका है।