1 अक्टूबर से बड़ा नियम लागू! PUC नहीं तो पेट्रोल-डीजल भी नहीं, NCR के 26 लाख वाहन मालिकों पर असर

लखनऊ। दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने आगामी 1 अक्टूबर से एनसीआर क्षेत्र के सभी पेट्रोल पंपों पर “नो प्रदूषण प्रमाणपत्र, नो फ्यूल” व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है।

इस नई व्यवस्था के तहत यदि किसी वाहन के पास वैध पीयूसी (Pollution Under Control) प्रमाणपत्र नहीं होगा तो उसे पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस कदम से वायु प्रदूषण में 30 से 35 प्रतिशत तक कमी लाने में मदद मिलेगी।

मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में एनसीआर क्षेत्र के प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी विभाग समन्वय के साथ समयबद्ध तरीके से कार्रवाई सुनिश्चित करें।

1 अक्टूबर से लागू होगा नया नियम

प्रदेश सरकार के अनुसार एनसीआर क्षेत्र में मौजूद 1,041 पेट्रोल पंपों पर “नो पीयूसी, नो फ्यूल” नीति लागू की जाएगी। इसका सीधा असर लाखों वाहन चालकों पर पड़ेगा। यदि वाहन मालिकों ने समय रहते अपना प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं बनवाया तो उन्हें ईंधन लेने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

 

26 लाख से ज्यादा पुराने वाहनों की पहचान

बैठक में बताया गया कि एनसीआर के जिलों में 26.19 लाख ऐसे वाहनों की पहचान की गई है जो अपनी निर्धारित आयु पूरी कर चुके हैं और प्रदूषण फैलाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच 37,156 पुराने वाहनों को स्क्रैप किया जा चुका है, जबकि 460 वाहनों को जब्त भी किया गया है। सरकार आने वाले महीनों में इस अभियान को और तेज करने की तैयारी में है।

इलेक्ट्रिक बसों से बदलेगी तस्वीर

सरकार सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण अनुकूल बनाने पर भी जोर दे रही है। गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में कुल 975 इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने का लक्ष्य तय किया गया है।

फिलहाल 100 ई-बसें सड़कों पर उतर चुकी हैं, जबकि शेष बसों को चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जाएगा। इससे डीजल आधारित परिवहन पर निर्भरता कम होगी और प्रदूषण में कमी आएगी।

प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर सख्ती

एनसीआर क्षेत्र में 725 प्रदूषणकारी उद्योगों की पहचान की गई है। इनमें से 613 उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) स्थापित कर उन्हें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वर से जोड़ दिया गया है।

इस तकनीक के माध्यम से उद्योगों से निकलने वाले धुएं और गैसों की निगरानी रियल टाइम में की जा सकेगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों पर तत्काल कार्रवाई होगी।

सड़कों की सफाई और धूल नियंत्रण पर फोकस

धूल को प्रदूषण का प्रमुख कारण मानते हुए सरकार ने सड़क पुनर्विकास और मशीनों से सफाई का बड़ा प्लान तैयार किया है।

गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में 1,792 किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास का लक्ष्य रखा गया है, जिस पर लगभग 3,666 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

फिलहाल 143.8 किलोमीटर सड़क का पुनर्विकास पूरा हो चुका है। सड़कों की सफाई के लिए 108 मशीनों की आवश्यकता बताई गई है, जिनमें से 45 मशीनें उपलब्ध हैं और 50 नई मशीनों की खरीद प्रक्रिया जारी है।

डिजिटल निगरानी से होगी मॉनिटरिंग

सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी सभी गतिविधियों की डिजिटल मॉनिटरिंग के लिए एकीकृत नेटवर्क विकसित करने का फैसला किया है। इसमें मोबाइल ऐप, जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम, ऑनलाइन डैशबोर्ड और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की मदद ली जाएगी।

इसके अलावा पराली प्रबंधन, पौधारोपण, बायोगैस प्लांट, ईवी चार्जिंग स्टेशन और आरआरटीएस जैसी परियोजनाओं को भी प्रदूषण नियंत्रण रणनीति का हिस्सा बनाया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार की यह योजना पूरी तरह सफल रही तो दिल्ली-एनसीआर की हवा की गुणवत्ता में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि लाखों वाहन मालिकों के लिए यह नियम नई चुनौती भी साबित हो सकता है।

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