‘दो गज की दूरी’ वाले तंज से मचा सियासी भूचाल! अधीर रंजन ने खोला BJP-TMC बागियों का ‘गुप्त कनेक्शन’?

कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी बगावत और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष को लेकर छिड़े विवाद के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर बड़ा हमला बोला है। उनके बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

अधीर रंजन चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कोविड काल के प्रसिद्ध नारे “दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी” का जिक्र करते हुए भाजपा पर तीखा व्यंग्य किया। उन्होंने कहा कि भाजपा भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे TMC के बागी विधायकों से सार्वजनिक रूप से दूरी बनाए हुए है, लेकिन पर्दे के पीछे उन्हें राजनीतिक समर्थन और प्रोत्साहन दे रही है।

आखिर क्या है पूरा विवाद?

पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। पार्टी नेतृत्व द्वारा वरिष्ठ विधायक को विपक्ष का नेता बनाए जाने के बाद कई विधायकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।

बागी विधायकों का दावा है कि उन्हें पार्टी के अधिकांश विधायकों का समर्थन प्राप्त है और विधानसभा में विपक्ष का नेतृत्व करने का अधिकार उन्हीं को मिलना चाहिए। उन्होंने स्पीकर को समर्थन पत्र सौंपने का दावा भी किया है।

हालांकि पार्टी नेतृत्व ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे अनुशासनहीनता करार दिया है। इसी विवाद ने अब राज्य की राजनीति को और अधिक गर्मा दिया है।

अधीर रंजन का BJP पर सीधा हमला

ANI से बातचीत में अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि कई बागी विधायक विभिन्न जांच एजेंसियों की कार्रवाई और भ्रष्टाचार के मामलों से घिरे हुए हैं। ऐसे में वे राजनीतिक संरक्षण की तलाश कर रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विधायक जांच के डर से भाजपा के करीब जाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि भाजपा उन्हें सीधे अपने दल में शामिल नहीं करना चाहती क्योंकि इससे पार्टी की छवि प्रभावित हो सकती है।

इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि भाजपा “दो गज की दूरी” बनाए रखते हुए इन नेताओं को अलग समूह या संगठन बनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

अधीर रंजन के इस बयान ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टिप्पणी सीधे तौर पर भाजपा और बागी विधायकों के कथित संबंधों की ओर इशारा करती है।

TMC के भीतर क्यों बढ़ रहा असंतोष?

राजनीतिक जानकारों के अनुसार हाल के वर्षों में पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक फैसलों को लेकर कई स्तरों पर नाराजगी बढ़ी है।

कुछ नेताओं का मानना है कि निर्णय प्रक्रिया में सीमित लोगों की भूमिका बढ़ने से जमीनी नेताओं की उपेक्षा हुई है। यही कारण है कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे ने लंबे समय से चल रही नाराजगी को खुलकर सामने ला दिया।

बागी नेताओं का दावा है कि उनके समर्थन पत्रों और हस्ताक्षरों का गलत इस्तेमाल किया गया है। वहीं पार्टी नेतृत्व इन आरोपों को निराधार बता रहा है।

BJP की क्या है रणनीति?

भाजपा ने अब तक इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बंगाल में बदलते समीकरणों के बीच भाजपा हर राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि TMC में बगावत बढ़ती है तो इसका फायदा विपक्षी दलों को मिल सकता है। विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों स्तरों पर इसका असर दिखाई दे सकता है।

बंगाल की राजनीति में बढ़ती अनिश्चितता

पश्चिम बंगाल की राजनीति हमेशा से तीखे राजनीतिक संघर्षों के लिए जानी जाती रही है। वर्तमान विवाद ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि राज्य की सियासत में आने वाले दिनों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर शुरू हुआ यह विवाद अब सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए चुनौती बन गया है। यदि पार्टी के भीतर असंतोष और बढ़ता है तो इसका असर भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल सभी की निगाहें विधानसभा स्पीकर, पार्टी नेतृत्व और बागी विधायकों की अगली रणनीति पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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