2 करोड़ फॉलोअर्स वाला ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ फाउंडर 6 जून को भारत लौटेगा! जंतर-मंतर पर होगा बड़ा प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

2 करोड़ फॉलोअर्स के साथ चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी, अब दिल्ली में होगा शक्ति प्रदर्शन

सोशल मीडिया: पर तेजी से लोकप्रिय हुई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) एक बार फिर सुर्खियों में है। पार्टी के संस्थापक और डिजिटल मीडिया रणनीतिकार अभिजीत दिपके ने घोषणा की है कि वह 6 जून को भारत लौटेंगे और राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद करना बताया जा रहा है।

अभिजीत दिपके ने यह जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मौजूद अकाउंट ‘Cockroach Is Back’ के माध्यम से साझा की। उनके इस एलान के बाद सोशल मीडिया पर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।

कौन हैं अभिजीत दिपके?

30 वर्षीय अभिजीत दिपके महाराष्ट्र के संभाजीनगर (औरंगाबाद) के रहने वाले हैं। उन्होंने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की और बाद में डिजिटल मीडिया एवं राजनीतिक संचार के क्षेत्र में काम किया। वर्तमान में वह अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन विषय में मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं।

अभिजीत 2020 से 2022 तक आम आदमी पार्टी (AAP) के सोशल मीडिया रणनीतिकार भी रह चुके हैं। दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने पार्टी के लिए डिजिटल कैंपेन और वायरल कंटेंट तैयार किया था। बाद में उच्च शिक्षा और व्यक्तिगत कारणों से उन्होंने राजनीतिक संगठन से दूरी बना ली और अमेरिका चले गए।

कैसे बनी कॉकरोच जनता पार्टी?

कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत मई 2026 में सोशल मीडिया अभियान के रूप में हुई थी। यह पहल राजनीतिक और सामाजिक व्यंग्य (सटायर) पर आधारित बताई जाती है। कुछ ही दिनों में इसके इंस्टाग्राम अकाउंट ने 2 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स जुटा लिए, जिससे यह देश के सबसे तेजी से बढ़ते डिजिटल अभियानों में शामिल हो गया।

पार्टी के समर्थकों का दावा है कि यह मंच युवाओं को अभिव्यक्ति का अवसर देता है, जबकि आलोचकों का कहना है कि इसके कई पोस्ट विवादित और राजनीतिक रूप से उकसाने वाले रहे हैं।

X अकाउंट पर लगा प्रतिबंध

21 मई को कॉकरोच जनता पार्टी का आधिकारिक X अकाउंट अचानक ब्लॉक कर दिया गया। उस समय अकाउंट पर लगभग 1.93 लाख फॉलोअर्स मौजूद थे। इसके बाद संगठन ने नया अकाउंट बनाकर उसका नाम ‘Cockroach Is Back’ रखा।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इनपुट के आधार पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत कार्रवाई की थी। बताया गया कि यह कदम खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया।

हालांकि, अभिजीत दिपके और उनकी टीम ने इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

दिल्ली हाईकोर्ट में क्या हुआ?

29 मई को दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी के X अकाउंट से प्रतिबंध हटाने की तत्काल मांग को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने केंद्र सरकार और X (पूर्व ट्विटर) को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मामले के व्यापक प्रभाव और संभावित परिणामों को देखते हुए सरकार का पक्ष सुने बिना कोई अंतरिम आदेश देना उचित नहीं होगा। इस मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को निर्धारित की गई है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी

भारत लौटने के बाद अभिजीत दिपके दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने दावा किया है कि यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर होगा। सोशल मीडिया पर उनके समर्थक इस आयोजन को बड़े जनआंदोलन का रूप देने की बात कर रहे हैं।

दूसरी ओर, राजनीतिक हलकों में इस प्रदर्शन को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ इसे युवाओं की आवाज बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे डिजिटल लोकप्रियता को राजनीतिक प्रभाव में बदलने की कोशिश मान रहे हैं।

सोशल मीडिया से सड़क तक का सफर

विशेषज्ञों का मानना है कि कॉकरोच जनता पार्टी का तेजी से उभरना इस बात का संकेत है कि सोशल मीडिया अब केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभाव का बड़ा मंच बन चुका है। करोड़ों फॉलोअर्स के साथ CJP ने कम समय में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।

अब सभी की नजरें 6 जून पर टिकी हैं, जब अभिजीत दिपके भारत लौटकर पहली बार सार्वजनिक रूप से अपने समर्थकों के बीच दिखाई देंगे।

कॉकरोच जनता पार्टी और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके वर्तमान समय में सोशल मीडिया और राजनीति के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल हो चुके हैं। X अकाउंट विवाद, हाईकोर्ट की सुनवाई और जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन ने इस संगठन को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। 6 जून का दिन यह तय कर सकता है कि यह अभियान केवल डिजिटल ट्रेंड बनकर रहेगा या वास्तविक राजनीतिक प्रभाव भी पैदा करेगा।

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