कुशीनगर: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और उसके बाद सामने आई तबाही की तस्वीरों ने सिर्फ बड़े-बुजुर्गों को ही नहीं, बल्कि बच्चों को भी अंदर तक झकझोर दिया है। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से सामने आई एक ऐसी ही तस्वीर लोगों का ध्यान खींच रही है। यहां महज 10 साल के अल्फाज शेख ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए अपनी पूरी जमा पूंजी दान करने का फैसला किया। कक्षा 3 में पढ़ने वाले अल्फाज ने अपनी गुल्लक जिला मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह तंवर को सौंप दी।
अल्फाज की यह पहल इसलिए खास है क्योंकि जिस उम्र में बच्चे अपनी छोटी-छोटी जरूरतों और पसंद की चीजों के लिए पैसे बचाते हैं, उसी उम्र में इस बच्चे ने अपनी बचत किसी और के काम आने का फैसला किया। बताया गया है कि अल्फाज करीब एक साल से अपनी गुल्लक में पैसे जमा कर रहा था। यह रकम उसके लिए सिर्फ सिक्के और नोट नहीं थे, बल्कि लंबे समय से की जा रही छोटी-छोटी बचत का नतीजा थी।
नेपाल की तबाही के वीडियो देखकर आया मदद का ख्याल
अल्फाज ने बताया कि उसने YouTube पर नेपाल में आई बाढ़ के वीडियो देखे थे। वीडियो में बाढ़ से हुई तबाही, लोगों के प्रभावित होने और घरों के उजड़ने की तस्वीरें देखकर उसे काफी दुख हुआ। इसके बाद उसके मन में सवाल आया कि वह अपनी तरफ से पीड़ितों के लिए क्या कर सकता है।
इसी सोच के बाद अल्फाज ने अपनी गुल्लक दान करने का फैसला किया। उसने सबसे पहले अपनी इच्छा अपने दादा को बताई। परिवार को जब बच्चे के इस फैसले के बारे में पता चला तो उन्होंने उसका साथ दिया। इसके बाद अल्फाज अपनी गुल्लक लेकर जिला प्रशासन तक पहुंचा और उसे डीएम महेंद्र सिंह तंवर को सौंप दिया।
एक बच्चे के इस कदम ने आसपास के लोगों को भी भावुक कर दिया। सोशल मीडिया पर भी अल्फाज की कहानी चर्चा में आई और लोगों ने उसकी संवेदनशीलता की सराहना की। कई लोगों के लिए यह पहल इसलिए प्रेरणादायक है क्योंकि अल्फाज ने मदद के लिए अपनी क्षमता के मुताबिक योगदान देने की कोशिश की।
एक साल से जमा कर रहा था पैसे
अल्फाज की गुल्लक में कितनी रकम जमा थी, इसका आंकड़ा सामने नहीं आया है, लेकिन परिवार के मुताबिक वह पिछले करीब एक साल से इसमें पैसे डाल रहा था। आम तौर पर बच्चे अपनी गुल्लक में जमा रकम से खिलौने, खाने-पीने की चीजें या अपनी पसंद की दूसरी चीजें खरीदने की योजना बनाते हैं।
अल्फाज ने अपनी बचत को अपने ऊपर खर्च करने के बजाय बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए देने का फैसला किया। उसकी उम्र भले ही सिर्फ 10 साल है, लेकिन इस फैसले ने यह संदेश जरूर दिया कि मदद करने के लिए बड़ी उम्र या बड़ी रकम जरूरी नहीं होती।

नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही
दरअसल, नेपाल में हाल की बाढ़ और उससे जुड़ी आपदा ने कई इलाकों में गंभीर स्थिति पैदा की है। बाढ़ के बाद सामने आई तस्वीरों में सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे प्रभावित दिखाई दिए। कई दूरदराज के इलाकों में राहत और बचाव अभियान चलाए जाने की जानकारी सामने आई है।
उपलब्ध रिपोर्टों में इस आपदा से बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने और जान-माल के नुकसान की बात कही गई है। हालांकि, मृतकों और लापता लोगों की संख्या अलग-अलग रिपोर्टों में बदल सकती है, इसलिए अंतिम आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही इनकी पुष्टि की जानी चाहिए।
बाढ़ जैसी आपदा के दौरान सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों तक भोजन, पानी, दवाइयां और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाना होती है। ऐसे समय में प्रशासन और राहत एजेंसियों के साथ आम लोगों की मदद भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अल्फाज की छोटी-सी गुल्लक, बड़ा संदेश
अल्फाज शेख की कहानी सिर्फ एक बच्चे के गुल्लक दान करने की कहानी नहीं है। यह इस बात की मिसाल है कि संवेदनशीलता उम्र देखकर नहीं आती। नेपाल में बाढ़ की तस्वीरें देखकर अल्फाज ने दूसरे लोगों का दर्द महसूस किया और अपनी तरफ से जो संभव था, वह करने का फैसला किया।
उसने न किसी बड़े अभियान का इंतजार किया और न ही यह सोचा कि उसकी छोटी रकम से कितना फर्क पड़ेगा। उसने बस अपनी बचत जरूरतमंदों को देने का निर्णय लिया। यही सोच इस घटना को खास बनाती है।

