नई दिल्ली: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर ऐसा बयान दिया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने कहा कि यदि उनकी हत्या की जाती है तो उन्होंने पहले से ही ऐसी जवाबी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, जिसे ईरान ने पहले कभी नहीं देखा होगा। उनके इस बयान के बाद अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
ट्रंप ने एक इंटरव्यू के दौरान दावा किया कि वह लंबे समय से ईरान के निशाने पर हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर संभावित खतरों की जानकारी है, लेकिन वह इससे डरने वाले नहीं हैं। ट्रंप के अनुसार, यदि उनके साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो उसके जवाब में पहले से तय रणनीति के तहत कड़ी सैन्य कार्रवाई की जाएगी।
इजरायल की खुफिया चेतावनी से बढ़ी चिंता
रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल की खुफिया एजेंसियों ने अमेरिका को जानकारी दी है कि ईरान कथित तौर पर ट्रंप को निशाना बनाने की नई साजिश पर काम कर रहा है। बताया जा रहा है कि इस इनपुट के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं और संभावित खतरों की लगातार निगरानी कर रही हैं।
हालांकि अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां ऐसे सभी इनपुट का गंभीरता से मूल्यांकन कर रही हैं।
“मैं उनकी किल लिस्ट में सबसे ऊपर हूं”
ट्रंप ने कहा कि वह ईरान की कथित “किल लिस्ट” में सबसे ऊपर हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पद पर रहने वाले या पूर्व राष्ट्रपति होने के कारण इस तरह के खतरे असामान्य नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि वह दुनिया के हित में जो सही समझते हैं, वही करते रहेंगे और किसी भी धमकी के कारण अपने फैसले नहीं बदलेंगे।

अमेरिकी एजेंसियां रख रही हैं नजर
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसियां उन व्यक्तियों और समूहों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं, जो मौजूदा या पूर्व अमेरिकी अधिकारियों के खिलाफ संभावित हमलों की चर्चा कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि किसी भी संभावित खतरे को गंभीरता से लिया जा रहा है।
हालांकि अभी तक किसी आधिकारिक एजेंसी ने ट्रंप के खिलाफ किसी सक्रिय साजिश की पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं की है।
कुछ अधिकारियों ने जताई अलग राय
कुछ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इजरायल की ओर से साझा की गई खुफिया जानकारी का उद्देश्य अमेरिका को ईरान के खिलाफ अधिक सख्त रुख अपनाने के लिए प्रेरित करना भी हो सकता है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों में खुफिया सूचनाओं का राजनीतिक और रणनीतिक महत्व काफी बढ़ गया है।
ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई बातचीत
रिपोर्टों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर बातचीत भी हुई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक समन्वय बनाए रखने पर चर्चा की।
बताया गया कि इस बातचीत में खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और ईरान से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
ईरान को लेकर नेतन्याहू का सख्त संदेश
इजरायल के प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि ईरान के साथ तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के मुद्दे पर इजरायल किसी भी चुनौती का जवाब देने के लिए तैयार है। हालांकि किसी संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर आधिकारिक स्तर पर कोई नई घोषणा नहीं की गई।
ट्रंप पर कथित हमले की साजिश का मामला
इसी बीच अमेरिका में ट्रंप से जुड़े एक अन्य मामले में आठ लोगों पर आतंकवाद और हत्या की साजिश से संबंधित आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ड्रोन और स्नाइपर हमले की कथित योजना बनाई गई थी। मामले की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं और न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता तनाव केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे बयानों और खुफिया दावों के बीच कूटनीतिक प्रयासों की भूमिका और भी अहम हो जाती है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और इजरायल की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।

