मेरठ: मेरठ कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज और एसएसपी अविनाश पांडेय द्वारा एक प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारने की घटना को लेकर प्रदेश भर में बहस तेज हो गई है। यह मामला अब केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का प्रमुख विषय बन चुका है। इसी विवाद के बीच एसएसपी अविनाश पांडेय ने एक वीडियो संदेश जारी कर पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी और समर्थकों तथा विरोधियों से एक अनोखी अपील की।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर दो अलग-अलग धाराएं देखने को मिलीं। एक वर्ग एसएसपी की कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी बताते हुए उन्हें “सिंघम” और “योद्धा” जैसी उपाधियों से सम्मानित कर रहा है। कई लोगों ने अपनी व्हाट्सएप डीपी, फेसबुक और इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर एसएसपी के समर्थन में पोस्ट साझा किए। उनका कहना है कि सार्वजनिक सड़क जाम कर कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं दूसरी ओर, कई लोग एसएसपी की कार्रवाई को अनुचित और असंवैधानिक बताते हुए इसकी आलोचना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर अनेक पोस्ट में सवाल उठाए जा रहे हैं कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा सार्वजनिक रूप से किसी व्यक्ति को थप्पड़ मारना क्या उचित पुलिसिंग का हिस्सा हो सकता है। कुछ लोगों ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ भी बताया।
इसी बीच नोएडा के एक अधिवक्ता द्वारा पुलिस जनसंपर्क अधिकारी (PRO) को फोन कर एसएसपी को लेकर तीखी टिप्पणी किए जाने की भी चर्चा रही। इंटरनेट मीडिया पर लगातार बढ़ती बहस और व्यक्तिगत टिप्पणियों के बीच एसएसपी अविनाश पांडेय ने लगभग दो मिनट का वीडियो जारी कर अपनी बात रखी।
वीडियो संदेश में एसएसपी ने कहा कि भारत का संविधान “भारत के लोगों” से शुरू होता है और किसी जाति या समुदाय के आधार पर भेदभाव नहीं करता। उन्होंने स्पष्ट किया कि कलेक्ट्रेट गेट पर जो कार्रवाई की गई, वह किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि कानून तोड़ने वाले लोगों के खिलाफ की गई थी। उनका दावा है कि पुलिस के पास पूरे घटनाक्रम के पर्याप्त वीडियो और अन्य साक्ष्य मौजूद हैं, जिनसे स्पष्ट होता है कि कुछ लोग बाहर से आकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे।

एसएसपी ने कहा कि जो लोग उनके बारे में निजी टिप्पणी कर रहे हैं, उन्हें समझाने और काउंसलिंग के माध्यम से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस की वर्दी की गरिमा को ठेस पहुंचाने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास करेगा तो उसके खिलाफ संविधान और कानून के दायरे में कार्रवाई की जाएगी।
अपने संदेश के दौरान एसएसपी ने एक अलग तरह की अपील भी की, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि जो लोग उनके समर्थन में हैं, वे आगामी वृक्षारोपण अभियान के दौरान एक पेड़ लगाएं और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखें। वहीं जो लोग उनके विरोध में हैं या उनसे नाराज हैं, वे दो पेड़ लगाकर अपने गुस्से को समाज के हित में बदलें।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जातीय या सामुदायिक विवादों में उलझने के बजाय समाज को बेहतर बनाने, पर्यावरण संरक्षण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अपनी ऊर्जा लगाएं। उनके अनुसार आने वाली पीढ़ियों को बेहतर समाज देना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
एसएसपी ने यह भी कहा कि जो लोग उन्हें धमकियां दे रहे हैं, वे सीधे उनसे आकर बातचीत कर सकते हैं। उन्होंने दोहराया कि पुलिस के पास सभी आरोपितों के वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले में सांसद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिक्रिया भी सामने आई। उन्होंने एसएसपी की पेड़ लगाने वाली अपील पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “हम 100 पेड़ लगाने को तैयार हैं, लेकिन उन पेड़ों की छांव किसे मिलेगी?” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
फिलहाल मेरठ का यह मामला सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर पुलिस अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बता रही है, वहीं दूसरी ओर विरोधी पक्ष इस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले पर प्रशासन और राजनीतिक दलों की आगे की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर बनी रहेगी।
मेरठ कलेक्ट्रेट लाठीचार्ज और थप्पड़ विवाद अब केवल एक स्थानीय घटना नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक कार्रवाई, पुलिस की भूमिका और लोकतांत्रिक अधिकारों पर व्यापक बहस का विषय बन चुका है। एसएसपी की पेड़ लगाने वाली अपील ने विवाद के बीच एक अलग संदेश देने की कोशिश की है, जबकि राजनीतिक प्रतिक्रियाओं ने इस मुद्दे को और चर्चा में ला दिया है। अब आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया इस मामले की दिशा तय करेगी।

