पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आया दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे
करीब: ₹31,000 करोड़ की लागत से तैयार किए गए दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को देश की आधुनिक सड़क परियोजनाओं में से एक माना गया था। 14 अप्रैल 2026 को इसके उद्घाटन के साथ दावा किया गया था कि दिल्ली से देहरादून का सफर करीब साढ़े छह घंटे से घटकर लगभग ढाई घंटे में पूरा किया जा सकेगा। लेकिन उद्घाटन के लगभग तीन महीने बाद ही पहली मानसूनी बारिश ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सड़क के कई हिस्सों में धंसाव, गड्ढे, किनारों पर मिट्टी कटान और जलभराव की घटनाओं के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
कहां-कहां सामने आईं गंभीर समस्याएं?
मानसून की शुरुआत के बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से गुजरने वाले एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में सड़क धंसने और बड़े गड्ढे बनने की शिकायतें सामने आईं।
रिपोर्ट के अनुसार, शामली जिले के गोगवान जलालपुर, हाथी करौदा और ख्यावड़ी कट के पास सड़क के किनारे मिट्टी धंसने की घटनाएं हुईं। वहीं सहारनपुर के गागलहेड़ी क्षेत्र में नन्हेड़ा गाजी गांव के पास मिट्टी कटान से रेलवे पुल और एक्सप्रेसवे की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई।
इसके अलावा कई स्थानों पर सर्विस रोड के किनारे मिट्टी कटने से सड़क की स्थिरता प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
वाहनों को हुआ नुकसान, सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो
सड़क पर बने गड्ढों और क्षतिग्रस्त हिस्सों के कारण कई वाहन प्रभावित हुए। कुछ वाहन चालकों ने दावा किया कि अचानक बने गड्ढों से उनकी गाड़ियों के अलॉय व्हील क्षतिग्रस्त हो गए।
इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद लोगों ने निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए। विपक्षी दलों ने भी मामले को लेकर सरकार और संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा।

NHAI ने क्या बताया?
एनएचएआई की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि भारी बारिश के दौरान जल निकासी प्रभावित होने से कुछ स्थानों पर पानी जमा हो गया, जिससे सड़क के किनारों की मिट्टी कमजोर हुई।
प्राधिकरण के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में प्रस्तावित जल निकासी व्यवस्था स्थानीय स्तर की बाधाओं और भूमि संबंधी विवादों के कारण पूरी तरह विकसित नहीं हो सकी थी। प्रारंभिक जांच में निर्माण गुणवत्ता और ढलान सुरक्षा से जुड़े कुछ तकनीकी पहलुओं की भी समीक्षा की आवश्यकता बताई गई है।
हालांकि, इन कारणों की अंतिम पुष्टि विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही होगी।
अधिकारियों पर कार्रवाई, कंपनियों को नोटिस
एनएचएआई ने प्रारंभिक जांच के आधार पर परियोजना से जुड़े कुछ अधिकारियों को निलंबित किया है। साथ ही निर्माण और परामर्श देने वाली एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में गंभीर लापरवाही या अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित एजेंसियों पर जुर्माना, भुगतान रोकने या ब्लैकलिस्ट करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
क्यों बनाई गई SIT?
एनएचएआई का कहना है कि केवल क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी। इतने बड़े राष्ट्रीय परियोजना की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पूरे एक्सप्रेसवे का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट आवश्यक है।
इसी उद्देश्य से गठित एसआईटी में तकनीकी विशेषज्ञ, एनएचएआई के इंजीनियर, एक सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता और स्वतंत्र ऑडिट विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं।
टीम को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
23 स्थानों से लिए जा रहे हैं सैंपल
एसआईटी ने दिल्ली से देहरादून के बीच कुल 23 स्थानों को जांच के लिए चिन्हित किया है।
इन सभी स्थानों पर कोर कटिंग तकनीक के माध्यम से सड़क की परतों के नमूने लिए जा रहे हैं। इन नमूनों की प्रयोगशाला में जांच कर यह परखा जाएगा कि निर्माण सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं।
जांच के दौरान आवश्यकता पड़ने पर रात के समय सीमित अवधि के लिए यातायात डायवर्ट भी किया जा सकता है।
मरम्मत कार्य भी जारी
एनएचएआई ने क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत शुरू कर दी है। जलभराव रोकने के लिए अस्थायी समानांतर नाले का निर्माण किया जा रहा है और मिट्टी कटान वाले क्षेत्रों को भी मजबूत किया जा रहा है।
प्राधिकरण ने संबंधित ठेकेदार को अपने खर्च पर सभी प्रभावित हिस्सों की मरम्मत करने के निर्देश दिए हैं।

