सूरत: गुजरात के सूरत शहर में कथित अवैध ध्वस्तीकरण को लेकर चल रहे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। गुजरात हाईकोर्ट ने इस मामले में सूरत महानगर पालिका की आयुक्त एम नागरत्ना से जवाब तलब किया है। अदालत के समक्ष प्रस्तुत मोबाइल चैट के स्क्रीनशॉट को प्रथम दृष्टया महत्वपूर्ण मानते हुए कोर्ट ने आयुक्त से शपथपत्र के माध्यम से अपना पक्ष रखने को कहा है।
मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को निर्धारित की गई है। इस दौरान अदालत यह भी देखेगी कि कार्यकारी अभियंता के निलंबन और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में किस स्तर तक प्रशासनिक आदेश दिए गए थे।
क्या है पूरा मामला?
मई 2026 के अंतिम सप्ताह में सूरत के नासीर नगर क्षेत्र में लगभग 100 मकानों और झोपड़ियों पर बुलडोजर चलाया गया था। स्थानीय लोगों का आरोप था कि बिना पर्याप्त पूर्व सूचना और वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए उनके घरों को ध्वस्त कर दिया गया।
कार्रवाई के बाद प्रारंभिक स्तर पर नगर निगम की ओर से ऐसी किसी कार्रवाई से इनकार किया गया। हालांकि, पीड़ित परिवारों द्वारा न्यायालय का दरवाजा खटखटाने और जांच की मांग उठने के बाद नगर निगम ने कार्रवाई स्वीकार करते हुए अपने कार्यकारी अभियंता सहित पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया।
मोबाइल चैट के स्क्रीनशॉट बने अहम कड़ी
मामले में नया मोड़ तब आया जब निलंबित कार्यकारी अभियंता ने अपने निलंबन को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी।
याचिका में अभियंता ने दावा किया कि उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन किया था। इसके समर्थन में उन्होंने कथित रूप से नगर आयुक्त एम नागरत्ना की ओर से मोबाइल चैट के माध्यम से दिए गए निर्देशों के स्क्रीनशॉट अदालत में प्रस्तुत किए।
हाईकोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई में इन स्क्रीनशॉट्स को गंभीरता से लेते हुए आयुक्त से जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस स्तर पर तथ्यों की विस्तृत जांच अभी बाकी है और अंतिम निष्कर्ष सुनवाई पूरी होने के बाद ही निकलेगा।
हाईकोर्ट ने किन सवालों के जवाब मांगे?
मामले की सुनवाई के दौरान गुजरात हाईकोर्ट ने नगर निगम और पुलिस प्रशासन से कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे हैं।
अदालत ने पूछा—
- प्रभावित परिवारों को पूर्व सूचना क्यों नहीं दी गई?
- ध्वस्तीकरण की कार्रवाई किस कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई?
- यदि पुलिस बल सीमांकन के लिए तैनात किया गया था, तो ध्वस्तीकरण के दौरान उसकी भूमिका क्या थी?
- अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का आधार क्या था?
इन सभी बिंदुओं पर संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जवाब मांगा गया है।
पीड़ित परिवारों के पुनर्वास पर भी अदालत की नजर
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार और सूरत महानगर पालिका से यह भी पूछा कि जिन परिवारों के मकान हटाए गए हैं, उनके पुनर्वास और मुआवजे की क्या व्यवस्था की जाएगी।
हाईकोर्ट ने सरकार से प्रभावित लोगों के लिए आवास और राहत से संबंधित योजना का विवरण भी प्रस्तुत करने को कहा है।
निलंबन के आदेश पर भी होगी सुनवाई
कार्यकारी अभियंता द्वारा दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि उन्हें बिना पूरी जिम्मेदारी तय किए निलंबित कर दिया गया।
अब हाईकोर्ट यह भी जांच करेगा कि निलंबन का निर्णय उपलब्ध तथ्यों और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुरूप था या नहीं।
21 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी। तब तक नगर आयुक्त एम नागरत्ना को शपथपत्र के माध्यम से अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा।
साथ ही, नगर निगम और राज्य सरकार से भी मांगी गई रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की जाएगी। सुनवाई के बाद ही अदालत आगे की दिशा तय करेगी।
आरोपों की भी होगी जांच
मामले से जुड़े कुछ आरोपों में यह भी दावा किया गया है कि ध्वस्तीकरण किसी निजी परियोजना को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और वे जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। अदालत की ओर से अभी इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है।

