नई दिल्ली/ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की औपचारिक शुरुआत से पहले ही भारत के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारतीय मुक्केबाजी की स्टार खिलाड़ी और ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने बिना रिंग में उतरे ही देश के लिए पहला पदक सुनिश्चित कर दिया है। महिलाओं के 75 किलोग्राम वर्ग में उन्हें ड्रॉ के दौरान ‘बाय’ मिलने से सीधे सेमीफाइनल में प्रवेश मिला है। कॉमनवेल्थ गेम्स के मौजूदा बॉक्सिंग नियमों के अनुसार सेमीफाइनल तक पहुंचने वाला प्रत्येक खिलाड़ी कम से कम कांस्य पदक का हकदार होता है। ऐसे में लवलीना का पदक पहले ही पक्का हो गया है।
यह भारत के लिए खेलों की शुरुआत से पहले एक शानदार उपलब्धि मानी जा रही है। इससे भारतीय दल का मनोबल भी बढ़ा है और पदकों की उम्मीदें मजबूत हुई हैं।
बिना मुकाबला खेले कैसे पक्का हुआ पदक?
महिलाओं की 75 किलोग्राम स्पर्धा में इस बार केवल पांच मुक्केबाजों ने भाग लिया है। प्रतियोगिता के ड्रॉ के अनुसार तीन खिलाड़ियों को सीधे सेमीफाइनल में जगह मिली, जबकि दो खिलाड़ियों के बीच एकमात्र क्वार्टरफाइनल मुकाबला रखा गया।
लवलीना उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्हें सीधा सेमीफाइनल खेलने का अवसर मिला। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के मुताबिक बॉक्सिंग में सेमीफाइनल हारने वाले दोनों खिलाड़ियों को कांस्य पदक दिया जाता है। इसलिए लवलीना का कम से कम कांस्य पदक पहले ही सुनिश्चित हो चुका है।
अब नजर स्वर्ण पदक पर
लवलीना बोरगोहेन 31 जुलाई को सेमीफाइनल मुकाबले में ताफाकी का सामना करेंगी। यदि वह यह मुकाबला जीतती हैं तो फाइनल में पहुंचकर कम से कम रजत पदक पक्का कर लेंगी और स्वर्ण पदक के लिए चुनौती पेश करेंगी।
अगर सेमीफाइनल में हार भी जाती हैं तो उन्हें कांस्य पदक मिलेगा। ऐसे में भारत के खाते में पहला पदक दर्ज होना तय है।

कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार पोडियम पर
लवलीना के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि कॉमनवेल्थ गेम्स में यह उनका पहला पदक होगा।
- गोल्ड कोस्ट 2018 में वह क्वार्टरफाइनल में हारकर बाहर हो गई थीं।
- बर्मिंघम 2022 में भी उनका सफर पहले ही मुकाबले में समाप्त हो गया था।
इन दोनों संस्करणों में उन्होंने 69 किलोग्राम वर्ग में हिस्सा लिया था, जबकि इस बार वह 75 किलोग्राम वर्ग में चुनौती पेश कर रही हैं।
हर बड़े मल्टी-स्पोर्ट इवेंट में पदक जीतने वाली खिलाड़ियों में शामिल
कॉमनवेल्थ गेम्स का यह पदक लवलीना के शानदार करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ देगा। इसके साथ ही वह उन भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हो जाएंगी जिन्होंने लगभग सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मल्टी-स्पोर्ट प्रतियोगिताओं में पदक जीता है।
अब उनके खाते में शामिल उपलब्धियां होंगी—
- टोक्यो ओलंपिक 2021 – कांस्य पदक
- विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप 2023 – स्वर्ण पदक
- एशियाई खेल 2023 (हांगझोउ) – रजत पदक
- कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 – कम से कम कांस्य पदक सुनिश्चित
यह उनके निरंतर शानदार प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने की क्षमता को दर्शाता है।
ओपनिंग सेरेमनी में भी निभाएंगी अहम भूमिका
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की उद्घाटन समारोह में भी लवलीना की विशेष भूमिका रहेगी। वह भारत की स्टार वेटलिफ्टर और ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई चानू के साथ भारतीय दल का प्रतिनिधित्व करेंगी।
दोनों खिलाड़ी भारतीय दल के लिए फ्लैग और बैटन बियरर की भूमिका निभाएंगी। यह सम्मान किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद गौरवपूर्ण माना जाता है।
भारत की पदक उम्मीदों को मिला बड़ा बल
लवलीना का पदक पक्का होने के बाद भारतीय खेल प्रेमियों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। भारतीय मुक्केबाजी दल से इस बार कई पदकों की उम्मीद की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लवलीना अपना अनुभव और आक्रामक खेल जारी रखती हैं तो वह स्वर्ण पदक की सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल होंगी।
अब पूरे देश की नजर उनके सेमीफाइनल मुकाबले पर होगी, जहां वह फाइनल का टिकट हासिल करने के इरादे से रिंग में उतरेंगी।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की शुरुआत से पहले ही भारत के लिए यह बड़ी सफलता है। लवलीना बोरगोहेन ने बिना मुकाबला खेले कम से कम कांस्य पदक सुनिश्चित कर देश को पहली खुशी दी है। अब भारतीय प्रशंसकों को उम्मीद है कि वह सेमीफाइनल जीतकर फाइनल में पहुंचेंगी और भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने का सपना भी पूरा करेंगी।

