गुजरात में ‘सैंड फ्लाई’ का कहर! चांदीपुरा वायरस से 3 मासूमों की मौत, डॉक्टरों ने जारी किया हाई अलर्ट
नई दिल्ली/गांधीनगर। गुजरात में एक बार फिर चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के कई जिलों में इस वायरस के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं और सबसे ज्यादा खतरा 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर मंडरा रहा है। अब तक सात बच्चों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से तीन मासूमों की मौत हो गई है, जबकि चार बच्चों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज जारी है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह वायरस मुख्य रूप से सैंड फ्लाई (रेत मक्खी) के काटने से फैलता है। बारिश के मौसम में इन कीटों की संख्या बढ़ने के कारण संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों में तेज बुखार या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए अस्पताल पहुंचें।
किन जिलों में सबसे ज्यादा असर?
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री ऋषिकेश पटेल के अनुसार, अब तक जिन जिलों में संक्रमण की पुष्टि हुई है, उनमें—
- गांधीनगर
- साबरकांठा
- खेड़ा
- अरावली
- पंचमहाल
मुख्य रूप से शामिल हैं।
इन जिलों के सरकारी अस्पतालों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। हिम्मतनगर के सिविल अस्पताल के पीडियाट्रिक आईसीयू (PICU) में कई बच्चे गंभीर हालत में भर्ती हैं, जिनमें कुछ वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं।
मासूमों की दर्दनाक कहानियां
चांदीपुरा वायरस ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं।
ईशा असारी
परिजनों ने शुरुआत में बच्ची को अस्पताल ले जाने के बजाय स्थानीय तांत्रिक (भूवा) के पास इलाज कराया। जब हालत ज्यादा बिगड़ गई तब उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। फिलहाल उसकी हालत गंभीर बनी हुई है और दादा-दादी अस्पताल के बाहर उसकी सलामती की दुआ कर रहे हैं।

आकृति (2 वर्ष)
सिर्फ दो साल की आकृति को अचानक तेज बुखार, उल्टी और कमजोरी हुई। महज 24 घंटे के भीतर उसकी मौत हो गई।
उसके पिता गोहिल परमार ने भावुक होकर कहा,
“वह हमारी इकलौती बेटी थी। हमें समझने तक का समय नहीं मिला कि आखिर हुआ क्या।”
जानकी परमार (3 वर्ष)
तीन वर्षीय जानकी भी इसी संक्रमण से जूझ रही है और डॉक्टर उसकी हालत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
क्या है चांदीपुरा वायरस?
चांदीपुरा वायरस एक दुर्लभ लेकिन बेहद खतरनाक वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता है। यह वायरस सैंड फ्लाई नामक छोटे कीट के काटने से फैलता है।
संक्रमण के बाद वायरस तेजी से मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है और एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
यदि समय पर इलाज न मिले तो यह संक्रमण जानलेवा भी साबित हो सकता है।
क्या हैं इसके प्रमुख लक्षण?
डॉक्टरों के अनुसार यदि बच्चे में निम्न लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए—
- तेज बुखार
- लगातार उल्टी
- दस्त
- ठंड लगना
- शरीर में ऐंठन
- बेहोशी
- दौरे पड़ना
- अत्यधिक कमजोरी
- मानसिक भ्रम
विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारी तेजी से बढ़ती है, इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
बारिश में क्यों बढ़ता है खतरा?
मानसून के दौरान नमी और गंदगी बढ़ने से सैंड फ्लाई की संख्या तेजी से बढ़ जाती है। ग्रामीण इलाकों में यह कीट अधिक पाया जाता है।
स्वास्थ्य विभाग ने स्थानीय प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में—
- कीटनाशक छिड़काव
- सफाई अभियान
- जागरूकता कार्यक्रम
- स्वास्थ्य शिविर
चलाने के निर्देश दिए हैं।
अंधविश्वास बन रहा सबसे बड़ा खतरा
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में परिजन पहले झाड़-फूंक या तांत्रिकों के पास चले जाते हैं, जिससे इलाज में देरी हो जाती है।
डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि चांदीपुरा वायरस का इलाज केवल अस्पताल में ही संभव है। घरेलू उपचार या अंधविश्वास पर भरोसा करना बच्चे की जान के लिए खतरा बन सकता है।
कैसे करें बचाव?
विशेषज्ञों ने बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बताई हैं—
- बच्चों को मच्छरदानी के अंदर सुलाएं।
- पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनाएं।
- घर और आसपास साफ-सफाई रखें।
- पानी जमा न होने दें।
- कीटरोधी क्रीम या रिपेलेंट का उपयोग करें।
- तेज बुखार या उल्टी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- इलाज में किसी भी तरह की देरी न करें।
स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया अलर्ट
राज्य स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी अस्पतालों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित जिलों में मेडिकल टीमों को सक्रिय कर दिया गया है और संदिग्ध मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और इलाज से कई बच्चों की जान बचाई जा सकती है। इसलिए अभिभावकों को घबराने के बजाय सतर्क रहने और डॉक्टर की सलाह का पालन करने की जरूरत है।
गुजरात में चांदीपुरा वायरस के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। अब तक तीन बच्चों की मौत और कई गंभीर मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह संक्रमण बेहद खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती लक्षणों को पहचानकर तुरंत अस्पताल पहुंचना ही सबसे प्रभावी बचाव है। साथ ही स्वच्छता, सैंड फ्लाई नियंत्रण और अंधविश्वास से दूरी बनाकर ही इस वायरस के खतरे को कम किया जा सकता है।

